यूपीआई पेमेंट को लेकर इन दिनों 0.4 फीसदी चार्ज की चर्चा ने लोगों और कारोबारियों का ध्यान खींचा है। सवाल यह उठ रहा है कि अगर कुछ यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू होता है, तो क्या इससे डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल कम हो सकता है? इस मुद्दे पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपनी राय रखी है।
आरबीआई गवर्नर के मुताबिक, मामूली शुल्क से यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। फिलहाल भी यूपीआई के इस्तेमाल में किसी बड़ी गिरावट के संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। यानी डिजिटल पेमेंट को लेकर लोगों की आदतों में तत्काल किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं मानी जा रही है।
आखिर क्या है 0.4 फीसदी UPI Charge?
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की ओर से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ यूपीआई लेनदेन पर 0.4 फीसदी MDR लगाने की बात सामने आई है। यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शुल्क सीधे आम ग्राहकों से वसूल किए जाने वाला चार्ज नहीं है।
यह MDR मुख्य रूप से व्यापारियों और कारोबारियों से जुड़ा शुल्क है। इसलिए किसी ग्राहक के यूपीआई से भुगतान करने पर सीधे उसके खाते से 0.4 फीसदी अतिरिक्त रकम कटने की बात नहीं है।
इसका असर किस पर पड़ेगा?
यूपीआई चार्ज को लेकर भ्रम की सबसे बड़ी वजह यही है कि कई लोग इसे ग्राहक से सीधे लिए जाने वाले शुल्क के तौर पर देख रहे हैं। जबकि MDR का संबंध पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारी पक्ष से है।
इसका संभावित असर इन क्षेत्रों पर देखा जा सकता है—
- दुकानदार और अन्य कारोबारी
- बड़े मूल्य वाले कुछ यूपीआई लेनदेन
- डिजिटल पेमेंट से जुड़े व्यापारिक मॉडल
- पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ी कंपनियां
क्या UPI का इस्तेमाल कम हो जाएगा?
आरबीआई गवर्नर ने संकेत दिया है कि मामूली शुल्क लगने से यूपीआई लेनदेन की संख्या में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। यूपीआई देश में डिजिटल भुगतान का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है और रोजमर्रा की खरीदारी से लेकर बड़े भुगतान तक इसका इस्तेमाल किया जाता है।
फिलहाल उपलब्ध संकेतों के आधार पर केंद्रीय बैंक को यूपीआई ट्रांजैक्शन में किसी बड़े बदलाव की आशंका नहीं है। हालांकि, नए शुल्क का वास्तविक प्रभाव कारोबारियों के व्यवहार और पेमेंट पैटर्न पर समय के साथ अधिक स्पष्ट होगा।
बैंक लोन को लेकर RBI का क्या कहना है?
आरबीआई गवर्नर ने बैंकिंग सेक्टर से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बैंकों की कर्ज देने की रफ्तार मजबूत बनी रहने की उम्मीद है।
अगर बैंकों से लोन की उपलब्धता मजबूत रहती है, तो इसका असर कारोबार और आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। कंपनियों और अन्य व्यवसायों को विस्तार के लिए वित्तीय सहायता मिलने की संभावना बनी रहती है।
हालांकि, आरबीआई की नजर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी NBFCs पर भी बनी हुई है। हाल के समय में बैंकों के पास जरूरत से अधिक नकदी देखने को मिली है। केंद्रीय बैंक इस बात पर नजर रख रहा है कि अतिरिक्त लिक्विडिटी के कारण कर्ज की गुणवत्ता पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
फिलहाल आरबीआई को इस मोर्चे पर किसी बड़ी समस्या की आशंका नहीं है।
NRI से जुटाई गई बड़ी रकम
आरबीआई गवर्नर ने प्रवासी भारतीयों से मिलने वाली जमा राशि को लेकर भी जानकारी साझा की। विशेष स्वैप सुविधा के तहत करीब 133 अरब डॉलर की जमा राशि जुटाई गई है।
इसे भारतीय अर्थव्यवस्था में भरोसे के एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। उम्मीद है कि बैंक इस राशि का इस्तेमाल सावधानी और बेहतर वित्तीय योजना के साथ करेंगे।
विदेशी निवेश और भारत के पेमेंट बैलेंस पर भी नजर
वैश्विक स्तर पर चल रही आर्थिक चुनौतियों का असर भारत में पूंजी प्रवाह पर भी पड़ा है। इसके कारण विदेशी पूंजी के प्रवाह में कुछ कमी देखने को मिली है और चालू खाते पर दबाव बना है।
आरबीआई गवर्नर के अनुसार, यह दबाव अस्थायी हो सकता है। आने वाले समय में भारत का पेमेंट बैलेंस दोबारा सरप्लस की स्थिति में लौटने की उम्मीद जताई गई है।
Tata Sons के सवाल पर टिप्पणी से इनकार
आरबीआई गवर्नर से Tata Sons के NBFC लाइसेंस से जुड़े सवाल भी पूछे गए। उनसे लाइसेंस वापस करने के अनुरोध और कंपनी की शेयर बाजार में लिस्टिंग से जुड़े नियमों पर भी सवाल किया गया।
हालांकि, उन्होंने इस मामले पर कोई सीधी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
आसान भाषा में समझें
- 0.4 फीसदी MDR की चर्चा कुछ यूपीआई लेनदेन से जुड़ी है।
- यह सीधे ग्राहकों से वसूला जाने वाला सामान्य चार्ज नहीं है।
- शुल्क का संबंध मुख्य रूप से कारोबारियों से है।
- RBI को यूपीआई ट्रांजैक्शन में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है।
- बैंक क्रेडिट ग्रोथ मजबूत रहने की उम्मीद जताई गई है।
- आरबीआई NBFC और लोन की गुणवत्ता पर भी नजर रख रहा है।
कुल मिलाकर, UPI Charge को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि 0.4 फीसदी MDR को आम ग्राहक पर सीधे लगने वाले शुल्क के रूप में नहीं समझना चाहिए। आरबीआई गवर्नर के बयान के मुताबिक, मामूली शुल्क से यूपीआई के कुल इस्तेमाल में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। आने वाले समय में इसका वास्तविक प्रभाव कारोबारियों और पेमेंट सिस्टम पर कितना पड़ता है, यह लेनदेन के आंकड़ों से और स्पष्ट होगा।
