प्रोटीन के देसी सोर्स में राजमा और छोले का नाम सबसे ऊपर आता है। और, वेजिटेरियन लोगों के लिए भी ये प्रोटीन का अच्छा सोर्स माना जाता है। लेकिन अगर आप कंफ्यूज हैं कि राजमा या छोले में से किसमे ज्यादा प्रोटीन होता है तो जान लें न्यूट्रिशन की पूरी डिटेल।
प्रोटीन का देसी और वेजिटेरन सोर्स अगर पूछा जाए तो लोग छोले और राजमा का ही नाम लेते हैं। और,राजमा-चावल या छोले चावल दोनों ही लोगों का पसंदीदा फूड रहता है। लेकिन कभी सोचा है कि राजमा या छोले किसमे ज्यादा मात्रा में प्रोटीन होता है। अगर नहीं तो आज हम बताएंगे आम, देसी आदमी के रोजाना के प्रोटीन सोर्स से कितना प्रोटीन उसे मिलता है। राजमा और छोले दोनों ही कीमत में साधारण होते हैं और आसानी से मिल जाते हैं। लेकिन ध्यान देने वाली बात है कि राजमा और छोले दोनों के प्रोटीन की मात्रा सूखे और पके होने के बाद अलग-अलग हो जाती है। तो चलिए जानें राजमा या छोले किसमे कितना है प्रोटीन?
राजमा या छोले कौन है विनर
हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि 100 ग्राम सूखे राजमा में 23-24 ग्राम के करीब प्रोटीन होता है। वहीं छोले यानि जो सफेद चने होते हैं उनके सूखे होने पर उसमे 19 ग्राम प्रोटीन ही होता है।
तो इस हिसाब से देखा जाए तो राजमा में ज्यादा प्रोटीन मिलता है। लेकिन जब इन दोनों को पका देते हैं तो मामला बिल्कुल अलग हो जाता है।
दरअसल, राजमा और छोले दोनों को पकाते वक्त ये पानी सोखते हैं। इन्हें अच्छी तरह पानी में भिगाया जाता है जिससे इनका वजन और साइज दोनों बढ़ता है और फिर इन्हें पकाते हैं। और, इस तरह से इनके प्रोटीन की मात्रा भी बदल जाती है।
डॉक्टर्स का कहना है कि एक कप पके हुए राजमा में मात्र 13-15 ग्राम प्रोटीन ही होता है। वहीं छोले में ये मात्रा भी बराबर होती है और पके हुए एक कप छोले में भी 14-15 ग्राम के लगभग प्रोटीन होता है।
वैराइटी का भी होता है असर
आपने देखा होगा मार्केट में राजमा की भी कई सारी वैराइटी मिलती है और छोले भी कुछ साइज में बेहद छोटे मिलते हैं तो कुछ के साइज थोड़े बड़े होते हैं। ऐसे में राजमा और छोले की वैराइटी, पकाने का तरीका इन पर भी प्रोटीन की मात्रा घटती-बढ़ती है।
क्या पकाने से राजमा और छोले का प्रोटीन घट जाता है?
राजमा और छोले में कुछ एंटीन्यूट्रिएंट्स भी होते हैं जैसे फाइलेट्स, लेक्टिंस, जो प्रोटीन के शरीर के अब्जार्ब्शन को रोकते हैं। जब आप इन्हें रातभर पानी में भिगोते हैं और फिर प्रेशर कुकर में पकाते हैं तो ये एंटीन्यूट्रिएंट्स कम होते हैं। जिससे प्रोटीन आसानी से शरीर में अब्जॉर्ब हो पाती है और पेट में गैस-ब्लोटिंग जैसी समस्या को भी कम करते हैं।
क्या प्रेशर कुकर में पकाने से प्रोटीन खत्म हो जाते हैं?
पकाने से राजमा और छोले के प्रोटीन कम नहीं होते हैं बल्कि जब इन बींस को पकाया जाता है तो ये सॉफ्ट हो जाते हैं और इनके न्यूट्रीशन आसानी से शरीर में अब्जॉर्ब हो पाते हैं। यहीं नहीं इनको पकाने से जो इनके कंपाउंड्स होते हैं जो डाइजेशन में दिक्कत करते हैं वो कम हो जाते हैं और पाचन को डिस्टर्ब नहीं करते हैं।
राजमा को खाते समय ना करें ये गड़बड़
राजमा अगर कच्चा है या पूरी तरह से पका नहीं है तो इसमे फाइटोहेमाग्लूटाइनिन होता है जो उल्टी, मितली और पाचन में समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए राजमा को कभी भी कम पकाकर या कच्चा खाने की भूल ना करें। इन्हें अच्छी तरह से पकाकर सॉफ्ट करके ही खाना चाहिए।
कितना फाइबर, कितना कार्ब्स और कैलोरी होता है
केवल प्रोटीन तो नहीं जिस कारण आप राजमा या छोले खाएं। इसमे और भी कई सारे न्यूट्रिशन होते हैं। एक कप पके हुए बींस यानि 160 ग्राम बींस में 210 कैलोरी, 38 ग्राम कार्ब्स और 12-13 ग्राम फाइबर होता है।
वहीं छोले की उतनी ही मात्रा में 250 कैलोरी,40 ग्राम कार्ब्स और 11 ग्राम फाइबर होता है।
इसके साथ ही दोनों में आयरन और फोलेट की मात्रा भी अच्छी खासी होती है। वहीं छोले में मैग्नीशियम और मैंगनीज जैसे मिनरल्स भी मिल जाते हैं।
इसलिए कहा जा सकता है कि राजमा या छोले दोनों में ही कॉम्प्लेक्स कार्ब्स, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स मिल जाते हैं।
हर इंसान को अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर दोनों को खाने के लिए चुनना चाहिए।
