Budh Pradosh Vrat Katha in Hindi: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है। हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत रखा जाता है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर बुध प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। बुध प्रदोष व्रत 23 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। मान्यता है कि प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने के साथ ही व्रत कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए। कहा जाता है कि बिना व्रत कथा के प्रदोष व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक पुरुष की नई-नई शादी हुई थी। वह गौने के दूसरी बार पत्नी को लाने के लिए ससुराल पहुंचा और सास से कहा कि बुधवार के दिन ही पत्नी को लेकर अपने नगर को वापस जाएगा। उस पुरुष के ससुराल वालों ने समझाया कि बुधवार को पत्नी को विदा कराकर लेकर जाना शुभ नहीं है, लेकिन वह पुरुष नहीं माना। विवश होकर सास-ससुर को अपने जमाता और पुत्री को भारी मन से विदा करना पड़ा। पति-पत्नी बैलगाड़ी से चले जा रहे थे। एक नगर से बाहर निकलते ही पत्नी को प्यास लगी। लड़का अपनी पत्नी के लिए लोटा लेकर पानी लेने चला गया।
हमशक्ल को देखकर क्रोधित हो उठा लड़का:
जब वह पानी लेकर वापस लौटा, तो उसके आश्चर्य की कोई सीमा नहीं रही। उसने देखा कि उसकी पत्नी के पास बिल्कुल उसकी शक्ल, सूरत और वेशभूषा वाला एक अन्य पुरुष बैठा हुआ है और दोनों आपस में बातें कर रहे है। लड़के ने क्रोधित होकर उस पुरुष से पूछा, “तुम कौन हो और मेरी पत्नी के पास क्यों बैठे हो?”
उस हमशक्ल पुरुष ने उत्तर दिया, “यह मेरी पत्नी है। मैं इसे अपने ससुराल से विदा कराकर ला रहा हूं। तुम कौन होते हो मुझसे यह पूछने वाले?” दोनों पुरुषों में भीषण विवाद होने लगा। झगड़ा बढ़ते देख नगर के सिपाही वहां आ गए। सिपाहियों ने लड़के की पत्नी से पूछा कि इन दोनों में से तुम्हारा असली पति कौन है? परंतु वह स्त्री भी स्तब्ध रह गई, दोनों पुरुष देखने में एक समान थे, इसलिए वह पहचान ही नहीं पाई कि उसका असली पति कौन है।
भगवान शिव से मांगी क्षमायाचना:
यह देखकर लड़का अत्यंत दुखी और निराश हो गया। उसने भगवान की शरण ली और हाथ जोड़कर भगवान शिव से प्रार्थना की। लड़के ने अपने भूल के लिए क्षमा मांगते हुए कहा- “हे भोलेनाथ! मुझे मेरी भूल के लिए क्षमा करें। मैंने अपने बुजुर्गों और धर्मशास्त्रों की आज्ञा का उल्लंघन करके बुधवार को यात्रा की, यह उसी का फल है। हे भोलेनाथ मेरी रक्षा करें।”
लड़के की ऐसी सच्ची प्रार्थना सुनकर भगवान शिव का हृदय द्रवित हो गया और उसी क्षण दूसरा पुरुष गायब हो गया। इसके बाद वह लड़का और उसकी पत्नी दोनों को समझ आ गया कि यह भगवान शिव की लीला का परिणाम था। इसके बाद दोनों सुखपूर्वक अपने घर पहुंचे। उस दिन के बाद से लड़के और उसकी पत्नी हर महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आने वाले बुध प्रदोष व्रत को नियमपूर्वक और श्रद्धाभाव से रखने लगे।
बुध प्रदोष व्रत का फल:
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, बुध प्रदोष व्रत करने से वैवाहिक जीवन में आने वाली रुकावटें और कलह दूर होते हैं। जातक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कार्यों में आने वाले विघ्न-बाधाएं समाप्त होती हैं।
