Tata Sons Chairman N Chandrasekaran: टाटा ग्रुप से 17 सितंबर 2026 को बड़ी खबर सामने आई है। एन. चंद्रशेखरन Tata Sons के चेयरमैन पद पर बने रहेंगे। बॉम्बे हाउस में हुई अहम बोर्ड बैठक में उन्हें मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद पांच साल के नए कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त करने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही उनका कार्यकाल 2032 तक जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है।
टाटा संस के बोर्ड ने यह फैसला बहुमत से लिया। हालांकि, बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने प्रस्ताव का विरोध किया। अब चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
चंद्रशेखरन ने दोबारा संभाली कमान
एन. चंद्रशेखरन साल 2017 से Tata Sons की कमान संभाल रहे हैं। इससे पहले वह टाटा समूह की प्रमुख आईटी कंपनी TCS के नेतृत्व में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
2022 में उन्हें दूसरी बार पांच साल के कार्यकाल के लिए Tata Sons का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। अब बोर्ड के ताजा फैसले के बाद उनके तीसरे कार्यकाल का रास्ता खुल गया है।
खास बात यह है कि कुछ समय पहले चंद्रशेखरन ने आगे चेयरमैन पद पर बने रहने को लेकर अपनी अनिच्छा जाहिर की थी। अब बोर्ड के अनुरोध के बाद उन्होंने अपने फैसले पर दोबारा विचार किया और नए कार्यकाल के लिए सहमति दी।
बोर्ड बैठक के बाद क्या कहा गया?
Tata Sons की ओर से जारी बयान के मुताबिक, 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक में एन. चंद्रशेखरन ने बोर्ड के अनुरोध पर अपने पहले के फैसले पर पुनर्विचार किया।
इसके बाद बोर्ड ने बहुमत से फैसला किया कि मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें पांच साल के लिए फिर से Executive Chairman नियुक्त किया जाए।
बोर्ड ने साथ ही लागू RBI नियमों के पालन के लिए जरूरी कदम उठाने और अनुपालन से जुड़े मामलों में RBI, Tata Trusts तथा अन्य संबंधित पक्षों से मार्गदर्शन लेने की बात भी कही।
नोएल टाटा के विरोध से बढ़ी चर्चा
चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर Tata Trusts की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। Tata Sons में Tata Trusts की बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर आगे होने वाली शेयरहोल्डर प्रक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।
इस पूरे घटनाक्रम में दो अलग-अलग बातें सामने आई हैं:
- Tata Sons के बोर्ड ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी है।
- नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया है।
- अंतिम प्रक्रिया में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी महत्वपूर्ण होगी।
- चंद्रशेखरन का नया कार्यकाल पांच साल का होगा।
- नया कार्यकाल पूरा होने पर उनका नेतृत्व 2032 तक जारी रह सकता है।
65 साल की उम्र के बाद भी जारी रहेगा कार्यकाल
इस फैसले की एक खास वजह चंद्रशेखरन की उम्र भी है। Tata Group की सामान्य नीति के तहत एग्जीक्यूटिव के लिए 65 वर्ष की उम्र में रिटायरमेंट का प्रावधान बताया जाता है।
चंद्रशेखरन का नया पांच साल का कार्यकाल पूरा होने तक उनकी उम्र करीब 70 वर्ष हो जाएगी। इसलिए उनका कार्यकाल सामान्य रिटायरमेंट आयु से आगे तक जारी रहने वाला है।
चंद्रशेखरन अक्टूबर 2016 में पहली बार Tata Sons के बोर्ड में शामिल हुए थे। जनवरी 2017 में उन्हें कंपनी का चेयरमैन बनाया गया था।
Tata Sons की लिस्टिंग का मुद्दा भी अहम
चंद्रशेखरन के नए कार्यकाल के साथ Tata Sons की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग का मुद्दा भी चर्चा में है।
सितंबर 2022 में RBI ने Tata Sons को Upper Layer NBFC के रूप में वर्गीकृत किया था। इस श्रेणी के तहत कंपनी पर लिस्टिंग से जुड़े नियामकीय नियम लागू होते हैं।
Tata Sons ने NBFC के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन वापस लेने के लिए RBI से आवेदन किया था। लेकिन 11 सितंबर 2026 को RBI ने इस आवेदन को खारिज कर दिया। इसके बाद Tata Sons की संभावित लिस्टिंग और IPO को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है।
अब आगे क्या होगा?
बोर्ड के फैसले के बाद अब शेयरहोल्डर स्तर की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। Tata Trusts की बड़ी हिस्सेदारी को देखते हुए AGM में होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
फिलहाल Tata Sons के सामने नेतृत्व के साथ-साथ नियामकीय अनुपालन और संभावित लिस्टिंग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
आगे की प्रक्रिया में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर नजर रहेगी:
- चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को शेयरहोल्डर्स की मंजूरी
- Tata Trusts की भूमिका
- RBI के नियमों का अनुपालन
- Tata Sons की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग
- कंपनी के भविष्य की नेतृत्व रणनीति
इस तरह 17 सितंबर 2026 का Tata Sons का बोर्ड फैसला टाटा समूह के नेतृत्व के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गया है। हालांकि, पांच साल के नए कार्यकाल को लेकर आगे की शेयरहोल्डर प्रक्रिया भी उतनी ही अहम रहेगी।
