भारत में खाने-पीने के शौकीनों की कोई कमी नहीं है। यहां स्वाद के लिए लोग कई तरह के स्ट्रीट फूड, मिठाइयां, स्नैक्स और मसालेदार चीजें खाना पसंद करते हैं। लेकिन कई बार स्वाद के चक्कर में हम ऐसी चीजों का सेवन भी कर लेते हैं, जिनके इस्तेमाल को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से सावधानी बरतने की सलाह देते रहे हैं।
सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसी लिस्ट वायरल होती रहती हैं, जिनमें दावा किया जाता है कि कुछ खाद्य पदार्थ भारत में आसानी से मिलते हैं, जबकि दूसरे देशों में उन पर प्रतिबंध या कड़े नियम हैं। हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है कि किसी चीज का किसी देश में बैन होना यह साबित नहीं करता कि वह हर देश में उसी तरह खतरनाक है। अलग-अलग देशों के खाद्य सुरक्षा नियम और अनुमत मात्रा अलग हो सकती है।
फिर भी कुछ खाद्य पदार्थ और उनके घटक ऐसे हैं, जिनका ज्यादा या लंबे समय तक सेवन स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय माना जाता है। आइए जानते हैं इनके बारे में।
1. गुटखा और तंबाकू वाले पान मसाला
गुटखा और तंबाकू वाले पान मसाला का सेवन भारत में लंबे समय से एक बड़ी स्वास्थ्य चिंता रहा है। तंबाकू में मौजूद कई रसायन कैंसर के जोखिम से जुड़े हैं। खासकर मुंह, गले और अन्य हिस्सों के कैंसर का खतरा तंबाकू सेवन से बढ़ सकता है।
पान मसाला में इस्तेमाल होने वाली सुपारी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जाती। विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर एजेंसी ने सुपारी यानी Areca Nut को कैंसरकारी पदार्थों की श्रेणी में रखा है।
भारत में तंबाकू उत्पादों की बिक्री और पैकेजिंग को लेकर कई नियम लागू हैं, जबकि अलग-अलग देशों में इन उत्पादों पर अलग-अलग तरह के प्रतिबंध या नियंत्रण देखने को मिलते हैं।
यानी सबसे बड़ा सवाल स्वाद नहीं, नियमित सेवन का है।
2. मिलावटी दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स
दूध भारतीय खान-पान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दूध, दही, पनीर, खोया और घी का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है। लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब इनमें मिलावट या गुणवत्ता से समझौता किया जाए।
भारत में खाद्य सुरक्षा के लिए नियम मौजूद हैं और मिलावट के खिलाफ कार्रवाई भी होती है। इसके बावजूद समय-समय पर मिलावटी दूध और डेयरी उत्पादों के मामले सामने आते रहते हैं।
दूध खरीदते समय केवल सस्ता विकल्प देखने के बजाय उसकी गुणवत्ता और स्रोत पर ध्यान देना जरूरी है।
खासकर खुले में बिकने वाले डेयरी उत्पाद खरीदते समय सावधानी बरतना बेहतर है।
3. वनस्पति घी और ट्रांस फैट
वनस्पति घी और कुछ हाइड्रोजनेटेड फैट वाले उत्पादों में ट्रांस फैट की मात्रा अधिक हो सकती थी। ट्रांस फैट का ज्यादा सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माना जाता है और यह हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम से जुड़ा है।
इसी वजह से दुनियाभर में ट्रांस फैट को कम करने के लिए नियम बनाए गए हैं। भारत में भी खाद्य उत्पादों में ट्रांस फैट की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए नियामकीय कदम उठाए गए हैं।
इसलिए यह कहना सही नहीं है कि हर तरह का वनस्पति तेल भारत में प्रतिबंधित है। असली मुद्दा ट्रांस फैट की मात्रा और उसके नियमित सेवन से जुड़ा है।
किन चीजों में ज्यादा सावधानी?
- डीप फ्राइड फूड
- बार-बार गर्म किया गया तेल
- कुछ पैकेज्ड स्नैक्स
- अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ
- ऐसे उत्पाद जिनमें हाइड्रोजनेटेड फैट मौजूद हो
4. आर्टिफिशियल फूड कलर
मिठाइयों और स्ट्रीट फूड को आकर्षक बनाने के लिए कई जगह फूड कलर का इस्तेमाल किया जाता है। जलेबी, कैंडी, कुछ मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में रंगों का इस्तेमाल आम है।
लेकिन सभी रंगों को एक जैसा नहीं माना जा सकता। अलग-अलग देशों में खाद्य रंगों को लेकर अलग नियम हैं। कुछ रंगों पर किसी देश में प्रतिबंध हो सकता है, जबकि दूसरे देश में निर्धारित मात्रा में उनके इस्तेमाल की अनुमति हो सकती है।
इसलिए बेहद चमकीले रंग वाले खाद्य पदार्थों को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है।
बच्चों को बहुत ज्यादा कृत्रिम रंग वाले खाद्य पदार्थ देने से बचना बेहतर है।
5. अजीनोमोटो यानी MSG
चाइनीज फूड और कई पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में स्वाद बढ़ाने के लिए MSG यानी Monosodium Glutamate का इस्तेमाल किया जाता है। भारत में इसे आम बोलचाल में अजीनोमोटो भी कहा जाता है।
MSG को लेकर इंटरनेट पर अक्सर दावा किया जाता है कि यह कई देशों में पूरी तरह बैन है। हालांकि, यह दावा सामान्य रूप से सही नहीं है। कई देशों में MSG को निर्धारित नियमों और मात्रा के तहत खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल करने की अनुमति है।
इसलिए MSG को लेकर किसी वायरल पोस्ट को देखकर घबराने के बजाय खाद्य उत्पाद का लेबल और संबंधित खाद्य सुरक्षा नियम देखना ज्यादा जरूरी है।
क्या विदेश में बैन चीज भारत में खाना खतरनाक है?
यह सबसे अहम सवाल है। इसका जवाब सीधे हां या ना में देना सही नहीं होगा।
खाद्य सुरक्षा के नियम हर देश में अलग होते हैं। किसी पदार्थ के इस्तेमाल की अधिकतम सीमा, वैज्ञानिक मूल्यांकन और नियामकीय प्रक्रिया भी अलग हो सकती है।
इसलिए किसी सोशल मीडिया पोस्ट में यह लिखा देखकर कि “यह चीज विदेश में बैन है”, उसे तुरंत खतरनाक मान लेना सही तरीका नहीं है।
खाने-पीने में रखें ये सावधानियां
- पैकेज्ड फूड का लेबल जरूर पढ़ें।
- खाद्य पदार्थ की एक्सपायरी डेट जांचें।
- संदिग्ध या मिलावटी उत्पादों से बचें।
- तंबाकू और सुपारी वाले उत्पादों से दूरी रखें।
- अत्यधिक तले हुए भोजन का सेवन सीमित करें।
- बहुत ज्यादा रंगीन मिठाइयों और खाद्य पदार्थों को कम मात्रा में लें।
- संतुलित डाइट को प्राथमिकता दें।
स्वाद के साथ सेहत का भी रखें ध्यान
खाना जीवन का जरूरी हिस्सा है, लेकिन स्वाद के लिए स्वास्थ्य से समझौता करना लंबे समय में भारी पड़ सकता है। खासकर तंबाकू, सुपारी, अत्यधिक ट्रांस फैट और मिलावटी खाद्य पदार्थों को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
वहीं MSG और फूड कलर जैसे मामलों में सोशल मीडिया के अधूरे दावों के बजाय आधिकारिक खाद्य सुरक्षा मानकों को देखना चाहिए।
आखिरकार, हर चीज का असर उसकी मात्रा, गुणवत्ता और सेवन की अवधि पर भी निर्भर करता है। इसलिए स्वाद लें, लेकिन समझदारी के साथ।
नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसे पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी स्वास्थ्य समस्या, एलर्जी या मेडिकल कंडीशन से संबंधित सवाल के लिए योग्य डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लें।
