रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमापूर्ण कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। स्वच्छता कार्यों में मशीनीकरण को बढ़ावा देने और सफाई कर्मियों को जोखिम भरे कार्यों से सुरक्षित रखने के प्रयासों का असर अब राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। ‘नमस्ते’ योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए देश में संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
यह उपलब्धि प्रदेश में स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक बनाने के साथ ही इस काम से जुड़े कर्मियों की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ‘नमस्ते’ यानी नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (NAMASTE) योजना का प्रमुख उद्देश्य स्वच्छता कार्यों में मानवीय जोखिम को कम करना और अधिक से अधिक सफाई कार्य मशीनों के माध्यम से सुनिश्चित करना है।
सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई जैसे जोखिम भरे कार्यों में कर्मचारियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक रही है। ऐसे में योजना के माध्यम से स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
मशीनों से सफाई पर बढ़ रहा जोर
परंपरागत तरीके से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान स्वच्छता कर्मियों को कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ सकता है। जहरीली गैस, ऑक्सीजन की कमी और दूसरे जोखिम गंभीर हादसों का कारण बन सकते हैं। इन्हीं खतरों को कम करने के लिए सफाई व्यवस्था में आधुनिक मशीनों और उपकरणों के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जा रही है।
छत्तीसगढ़ में भी इसी दिशा में स्वच्छता कार्यों के मशीनीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। उद्देश्य साफ है कि जहां मशीन से काम संभव है, वहां कर्मचारियों को जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में उतरने की आवश्यकता न पड़े। इससे न केवल सफाई व्यवस्था अधिक सुरक्षित होती है बल्कि काम की गति और प्रभावशीलता में भी सुधार आता है।
स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा सबसे अहम
‘नमस्ते’ योजना केवल सफाई व्यवस्था के मशीनीकरण तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में सफाई कर्मचारी और उनका कल्याण है। सुरक्षित उपकरण, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक के उपयोग के माध्यम से स्वच्छता कर्मियों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियां तैयार करना योजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
स्वच्छता कर्मी शहरों और कस्बों की सफाई व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन और नगरीय निकायों की बड़ी जिम्मेदारी है। छत्तीसगढ़ का संयुक्त रूप से देश में प्रथम स्थान हासिल करना इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सम्मानजनक कार्य वातावरण की ओर कदम
स्वच्छता से जुड़े काम को सुरक्षित बनाने के साथ ही कर्मचारियों को सम्मानजनक कार्य वातावरण देना भी जरूरी है। आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। मशीन आधारित सफाई व्यवस्था बढ़ने से जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में प्रत्यक्ष मानवीय हस्तक्षेप को कम करने में मदद मिलती है।
‘नमस्ते’ योजना इसी सोच को आगे बढ़ाती है। इसका उद्देश्य ऐसी स्वच्छता व्यवस्था विकसित करना है जिसमें सफाई कर्मचारी की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो। इसके लिए तकनीक, प्रशिक्षण और सुरक्षा व्यवस्था को एक साथ मजबूत करना आवश्यक है।
छत्तीसगढ़ के लिए क्यों खास है उपलब्धि?
देश में संयुक्त रूप से प्रथम स्थान हासिल करना छत्तीसगढ़ के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वच्छता प्रबंधन तेजी से शहरी प्रशासन की बड़ी चुनौती बन रहा है। शहरों के विस्तार और बढ़ती आबादी के साथ सीवरेज तथा सेप्टिक टैंक प्रबंधन की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में पुरानी व्यवस्थाओं के स्थान पर आधुनिक और सुरक्षित तकनीक अपनाना आवश्यक हो गया है।
इस उपलब्धि से यह संदेश भी मिलता है कि स्वच्छता का अर्थ केवल शहरों को साफ रखना नहीं है। सफाई करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
1,465 कर्मियों का सत्यापन पूरा
छत्तीसगढ़ में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई से जुड़े 1,487 कर्मियों का सर्वे कराया गया है। इनमें से 1,465 का सत्यापन पूरा हो चुका है। प्रदेश के 169 नगरीय निकायों में 1,428 कर्मियों को पीपीई किट उपलब्ध कराई गई है। वहीं 1,374 कर्मियों को आयुष्मान कार्ड दिए गए हैं। 139 कर्मियों को काम के दौरान सुरक्षा बरतने का प्रशिक्षण भी दिया गया है।
8,527 वेस्ट पिकर्स की प्रोफाइलिंग
योजना के दायरे में कचरा एकत्र करने वाले वेस्ट पिकर्स को भी शामिल किया गया है। प्रदेश में 8,527 वेस्ट पिकर्स की प्रोफाइलिंग की गई है, जिनमें से 6,799 का सत्यापन पूरा हो चुका है. 991 वेस्ट पिकर्स को पीपीई किट दी गई है, जबकि 512 को व्यावसायिक सुरक्षा का प्रशिक्षण मिला है. अब 6,287 वेस्ट पिकर्स को प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है।
14420 हेल्पलाइन से मिलेगी मदद
स्वच्छता से संबंधित आपात स्थिति में तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए प्रदेश में 47 ईआरएसयू यानी इमरजेंसी रिस्पांस सैनिटेशन यूनिट्स शुरू की गई हैं। इसके अलावा 14420 हेल्पलाइन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसके जरिए जरूरत पड़ने पर स्वच्छता से जुड़ी आपात सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
