भोपाल। महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी एनालॉग पनीर के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश मिलने के बाद बुधवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने प्रदेशभर में ताबड़तोड़ छापेमारी की।
देर रात तक चली इस संयुक्त कार्रवाई में पनीर, मावा और घी सहित करीब 8,135 किलोग्राम अमानक खाद्य सामग्री जब्त की गई। वहीं, राजधानी भोपाल में कार्रवाई की भनक लगते ही कई रिटेल दुकानों के स्टॉक से संदिग्ध पनीर गायब हो गया।
मामले में स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि प्रदेश में एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। जहां भी यह सामग्री पाई जाएगी, उसे तत्काल जब्त किया जाएगा। पड़ोसी राज्यों से एनालॉग दुग्ध उत्पादों की खेप मध्य प्रदेश में न पहुंचे, इसके लिए सीमावर्ती जिलों में चेकिंग बढ़ा दी गई है।
प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री पर रोक: दुकानदार अब एनालॉग पनीर, मावा, घी, मसाला-नमकीन पनीर, आइसक्रीम और चॉकलेट का स्टॉक या बिक्री नहीं कर सकेंगे।
पनीर की पूरी जानकारी देना अनिवार्य: विक्रेताओं को ग्राहकों को स्पष्ट बताना होगा कि पनीर असली दूध से बना है। जांच टीम को यह भी जानकारी देनी होगी कि पनीर कहां से खरीदा गया है।
सैंपलिंग और कानूनी कार्रवाई: खाद्य सुरक्षा टीम कभी भी सैंपल ले सकती है। गड़बड़ी या प्रतिबंधित उत्पाद मिलने पर स्टॉक जब्त करने के साथ भारी जुर्माना व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में प्रदेशभर से पनीर के 921 नमूने जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए थे। इनमें से 123 नमूने (लगभग 13 प्रतिशत) अमानक पाए गए, जिसके बाद सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है।
