गुड़-खजूर को चीनी का हेल्दी विकल्प समझना पड़ सकता है भारी! न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया मीठे का असली सच

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आजकल हेल्थ को लेकर जागरूक लोग सफेद चीनी से दूरी बनाने लगे हैं। चाय-कॉफी में चीनी की जगह गुड़, खजूर, कोकोनट शुगर या दूसरे स्वीटनर्स का इस्तेमाल बढ़ गया है। लोगों को लगता है कि नेचुरल चीजों से मिलने वाली मिठास शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद होती है और इससे वजन बढ़ने या डायबिटीज जैसी समस्याओं का खतरा भी कम हो सकता है।

लेकिन क्या सिर्फ चीनी की जगह गुड़ या खजूर इस्तेमाल करने से आपकी डाइट हेल्दी हो जाती है? न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. रोहिणी पाटिल के मुताबिक, ऐसा मानना सही नहीं है। मीठा चाहे किसी भी स्रोत से आए, उसकी मात्रा और सेवन की आवृत्ति सबसे ज्यादा मायने रखती है।

क्या कॉफी में चीनी की जगह खजूर डाल सकते हैं?

हां, कॉफी में मिठास के लिए खजूर का इस्तेमाल किया जा सकता है। खजूर प्राकृतिक रूप से मीठे होते हैं और इनमें फाइबर के अलावा पोटैशियम, मैग्नीशियम और कुछ एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं।

मेडजूल खजूर नरम और काफी मीठे होते हैं। इसलिए थोड़ी मात्रा से ही कॉफी में पर्याप्त मिठास आ सकती है।

हालांकि, इसे चीनी का ऐसा विकल्प नहीं समझना चाहिए जिसे बिना मात्रा की चिंता किए इस्तेमाल किया जा सके। खजूर में भी प्राकृतिक शुगर और कैलोरी होती है।

गर्म चाय या कॉफी में आर्टिफिशियल स्वीटनर डालना कितना सही?

आर्टिफिशियल स्वीटनर इस्तेमाल करने वालों के लिए यह समझना जरूरी है कि हर स्वीटनर गर्मी में एक जैसा व्यवहार नहीं करता।

अलग-अलग स्वीटनर्स की हीट स्टेबिलिटी अलग हो सकती है। उदाहरण के तौर पर सुक्रालोज आम तौर पर गर्मी को काफी हद तक सहन कर सकता है, लेकिन बहुत ज्यादा तापमान पर इसमें बदलाव संभव हैं।

इसलिए चाय, कॉफी या बेकिंग में किसी स्वीटनर का इस्तेमाल करने से पहले उसके पैकेट पर दिए गए निर्देशों को जरूर पढ़ें।

पैकेट वाले खाने में छिपी चीनी कैसे पहचानें?

किसी पैकेज्ड फूड के सामने ‘नेचुरल’, ‘हेल्दी’ या इसी तरह के दावे देखकर तुरंत उसे कम चीनी वाला न मानें। प्रोडक्ट के पीछे दी गई Ingredients List को पढ़ना ज्यादा जरूरी है।

चीनी कई अलग-अलग नामों से मौजूद हो सकती है, जैसे:

  • सुक्रोज
  • ग्लूकोज
  • फ्रुक्टोज
  • डेक्सट्रोज
  • माल्टोज
  • कॉर्न सिरप
  • राइस सिरप
  • माल्ट सिरप
  • शहद
  • गुड़
  • फलों का रस या जूस कॉन्संट्रेट

इसलिए पैकेट खरीदते समय सामग्री की सूची और Nutrition Facts दोनों पर नजर डालें।

क्या गुड़ या कोकोनट शुगर से डायबिटीज का खतरा कम होगा?

सिर्फ सफेद चीनी को गुड़ या कोकोनट शुगर से बदल देने से डायबिटीज का खतरा अपने आप बहुत कम नहीं हो जाता।

गुड़ में कुछ खनिज जरूर पाए जाते हैं, लेकिन उसमें भी शुगर और कैलोरी होती है। इसी तरह कोकोनट शुगर भी मीठा ही है और इसका जरूरत से ज्यादा सेवन कैलोरी बढ़ा सकता है।

इसलिए ‘नेचुरल’ शब्द देखकर किसी स्वीटनर को असीमित मात्रा में लेना सही नहीं है।

फिर खाने में मिठास कैसे बढ़ाएं?

डॉ. पाटिल की सलाह के मुताबिक, हर चीज में चीनी का विकल्प तलाशने के बजाय धीरे-धीरे मीठा खाने की आदत कम करना बेहतर तरीका हो सकता है।

अगर किसी खाने में प्राकृतिक मिठास चाहिए तो इन चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है:

  • केला
  • सेब
  • बेरीज
  • पका हुआ आम
  • खजूर

फलों से मिठास के साथ फाइबर और कई अन्य पोषक तत्व भी मिल सकते हैं।

चाय या कॉफी में बिना ज्यादा मिठास बढ़ाए स्वाद बेहतर करने के लिए इलायची, वनीला या बिना चीनी वाला कोको इस्तेमाल किया जा सकता है। कम कैलोरी वाला विकल्प तलाशने वाले लोग स्टीविया का सीमित मात्रा में इस्तेमाल कर सकते हैं।

तो क्या गुड़ चीनी से बेहतर है?

इस सवाल का जवाब इतना सीधा नहीं है। गुड़ और चीनी की पोषण संरचना अलग हो सकती है, लेकिन दोनों से मिलने वाली मिठास का मतलब यह नहीं कि गुड़ को मनमानी मात्रा में खाया जाए।

सबसे महत्वपूर्ण बात कुल मीठे का सेवन है। अगर कोई व्यक्ति चीनी छोड़कर बड़ी मात्रा में गुड़ या खजूर खाने लगे, तो सिर्फ स्वीटनर बदलने से डाइट में बड़ा फायदा नहीं होगा।

क्या समझें?

  • गुड़ को ‘शुगर-फ्री’ विकल्प न समझें।
  • खजूर में फाइबर और कुछ पोषक तत्व होते हैं, लेकिन इनमें प्राकृतिक शुगर भी होती है।
  • कोकोनट शुगर भी सीमित मात्रा में ही लेना बेहतर है।
  • पैकेज्ड फूड की Ingredients List जरूर पढ़ें।
  • मीठे की मात्रा धीरे-धीरे कम करने पर ध्यान दें।
  • जहां संभव हो, फलों से प्राकृतिक मिठास लेने का विकल्प अपनाया जा सकता है।

आखिर में सबसे जरूरी बात यही है कि मीठा चाहे चीनी से आए, गुड़ से या खजूर से—मात्रा मायने रखती है। सिर्फ ‘नेचुरल’ नाम देखकर किसी स्वीटनर को जरूरत से ज्यादा खाना सही नहीं है।

नोट: यह लेख सामान्य पोषण संबंधी जानकारी पर आधारित है। डायबिटीज या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या में डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य न्यूट्रिशनिस्ट से व्यक्तिगत सलाह लें।

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