बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा-2021 में हुए चर्चित प्रश्नपत्र लीक एवं भर्ती घोटाले में गिरफ्तार आयोग के पूर्व सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव (62 वर्ष) को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है।
उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी पूर्व सचिव की नियमित जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।
प्रतियोगी परीक्षाओं का पर्चा लीक करना हत्या से भी जघन्य
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं का पर्चा लीक करने जैसे कृत्य से लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद होता है। यह अपराध हत्या से भी अधिक जघन्य है, क्योंकि हत्या से केवल एक परिवार प्रभावित होता है, लेकिन ऐसे कृत्यों से पूरे समाज और व्यवस्था पर असर पड़ता है।
मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र बेटे को उपलब्ध कराने का आरोप
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच के अनुसार, वर्ष 2020 से 2022 के बीच जब सीजीपीएससी की राज्य सेवा परीक्षा आयोजित की जा रही थी, तब जीवन किशोर ध्रुव आयोग के सचिव पद पर पदस्थ थे। आरोप है कि पद की गोपनीयता बनाए रखने की संवैधानिक जिम्मेदारी होने के बावजूद उन्होंने मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र अपने बेटे सुमित ध्रुव (आरोपी-9) को उपलब्ध कराए।
छापेमारी में क्वेश्चन-कम-आंसर बुकलेट की प्रतियां बरामद हुईं
सीबीआई द्वारा आरोपी के भिलाई स्थित आवास पर की गई छापेमारी में पेपर नंबर-7 (सामान्य अध्ययन) के उत्तर और पेपर नंबर-2 (निबंध) के क्वेश्चन-कम-आंसर बुकलेट की प्रतियां बरामद हुईं। जांच में सामने आया कि मुख्य परीक्षा के पेपर नंबर-7 के 47 प्रश्नों में से 42 प्रश्न वही थे, जो आरोपी के घर से जब्त दस्तावेजों में दर्ज थे।
डिप्टी कलेक्टर के लिए चयन
प्रश्नपत्र लीक के दम पर ही उनके बेटे सुमित ध्रुव का चयन ‘डिप्टी कलेक्टर’ के पद पर हुआ था। आवेदक के वकीलों ने तर्क दिया था कि पूर्व सचिव ने अपने बेटों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी आयोग को पहले ही दे दी थी और वे गोपनीयता से जुड़े कार्यों से अलग रहे थे।
इसके अलावा उन्होंने सेवानिवृत्त अधिकारी होने, 18 सितंबर 2025 से जेल में बंद रहने और सह-आरोपी की तर्ज पर समानता के आधार पर जमानत की मांग की थी।
अदालत की सख्त टिप्पणी: “बाड़ ही खेत को खाने लगे”
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विभू दत्त गुरू की एकलपीठ में हुई। सीबीआई और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने आदेश में दर्ज किया कि “जो लोग प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करने में लिप्त होते हैं, वे उन लाखों युवाओं के करियर और भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं जो दिन-रात मेहनत करते हैं।
यह आरोपित अधिकारियों द्वारा ‘बाड़ ही खेत को खाने’ का स्पष्ट उदाहरण है। ऐसे मामलों के आरोपों को साधारण नहीं माना जा सकता।”
जमानत याचिका खारिज
हालांकि, कोर्ट ने इन सभी तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि एक उच्च प्रशासनिक पद पर बैठे लोकसेवक की भूमिका अन्य निजी व्यक्तियों से पूरी तरह अलग और बेहद गंभीर है। अदालत ने पाया कि जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य, गवाहों के बयान और आरोपी के घर से हुई बरामदगी प्रथम दृष्टया साजिश में उनकी सीधी संलिप्तता दर्शाते हैं।
भर्ती प्रक्रिया की पवित्रता और जन-विश्वास पर पड़े इसके गंभीर प्रभाव को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका निष्पादित/खारिज कर दी।
