दिल्ली के शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल एक बार फिर विवादों में घिर गया है। मरीजों के इलाज में कथित लापरवाही और अन्य अनियमितताओं की शिकायतों के बाद दिल्ली सरकार ने अस्पताल के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। मामले को गंभीर मानते हुए मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए, जिसके बाद विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में कई खामियां और नियमों के उल्लंघन सामने आने की बात कही जा रही है।
बेटे की मौत के बाद परिवार ने लगाया गंभीर आरोप
मामला तब चर्चा में आया जब एक परिवार ने जनसुनवाई के दौरान शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनके बेटे को चाकू मारकर घायल कर दिया गया था। गंभीर हालत में उसे इलाज के लिए शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने इलाज शुरू करने से पहले पैसों की मांग की। उनका कहना है कि समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके कारण उनके बेटे की मौत हो गई। शिकायत सामने आने के बाद सरकार ने मामले की जांच कराने का फैसला लिया।
जांच के लिए कई विभागों की संयुक्त टीम पहुंची
गुरुवार को जिला प्रशासन के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, अग्निशमन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों की संयुक्त टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान अस्पताल की कई व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
जांच में जिन बिंदुओं पर सवाल उठे, उनमें शामिल हैं—
- बिल्डिंग बायलॉज के कथित उल्लंघन।
- अवैध निर्माण से जुड़े आरोप।
- अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था में कमियां।
- बेसमेंट के उपयोग में नियमों का पालन नहीं होना।
- इमरजेंसी उपचार प्रक्रिया में कथित लापरवाही।
- चिकित्सीय SOP के पालन में अनियमितताएं।
CCTV फुटेज में सामने आई अहम जानकारी
जांच टीम ने अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की। अधिकारियों के अनुसार, फुटेज में घायल युवक खुद चलकर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग तक पहुंचता दिखाई दिया।
जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराया जाता, तो उसकी जान बचने की संभावना हो सकती थी। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
तैयार की जा रही विस्तृत रिपोर्ट
जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल के रिकॉर्ड, मरीजों की एंट्री रजिस्टर, उपचार से जुड़े दस्तावेज और अन्य आवश्यक जानकारियों की जांच की जा रही है।
निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों और शिकायतों को रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। विस्तृत रिपोर्ट तैयार होने के बाद अस्पताल के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल ने जांच में सहयोग का दिया भरोसा
मामले पर अस्पताल प्रशासन ने भी अपना पक्ष रखा है। अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि संस्था मरीजों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण इलाज और सभी नियामकीय मानकों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि जैसे ही उन्हें मामले से संबंधित औपचारिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, वे उसकी समीक्षा करेंगे और जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देंगे।
क्यों चर्चा में है यह मामला?
- इलाज से पहले पैसे मांगने के आरोप ने बहस छेड़ दी है।
- अस्पतालों में इमरजेंसी मरीजों के इलाज की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।
- जांच में बिल्डिंग और सुरक्षा नियमों से जुड़ी कई कथित अनियमितताएं सामने आई हैं।
- रिपोर्ट आने के बाद अस्पताल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई संभव मानी जा रही है।
अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला निजी अस्पतालों की जवाबदेही और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के नियमों पर बड़ा असर डाल सकता है।
