3 भारतीय नाविकों की मौत से अमेरिका पर भड़का भारत! जयशंकर ने रुबियो को सुनाई खरी-खरी, ट्रंप प्रशासन पर बढ़ा वैश्विक दबाव

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नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बात की और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर भारत का विरोध दर्ज कराया. इस बारे में विदेश मंत्री ने एक्स पर जानकारी दी है.

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘शुक्रवार शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात की. मैंने खाड़ी में अमेरिकी नौसेना द्वारा किए गए हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर भारत का विरोध दोहराया. कमर्शियल जहाजों के खिलाफ ऐसी घातक कार्रवाई उचित नहीं है.’

इससे पहले ओमान के तट पर कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अमेरिकी राजनयिक को दूसरी बार तलब किया था. भारत ने अमेरिकी राजनयिक जेसन मीक्स को तलब किया.भारत ने कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों को ‘बेहद चिंताजनक’ बताया और इस मामले को अमेरिका के सामने सख्ती से उठाया.

इस बीच अमेरिकी नौसेना के हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर संयुक्त राष्ट्र समेत दूसरे संगठनों और देशों ने अमेरिकी कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए इसे अस्वीकार्य बताया. अमेरिकी दादागीरी के सामने तनकर खड़े होते हुए अंतर्राष्ट्रीय मेरीटाइम संगठन (अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन ) ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर असर डालने वाली सभी गतिविधियों में अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्र में व्यक्ति की सुरक्षा का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए. वहीं UN ने कहा कि वो IMO के बयान से इत्तेफाक रखता है.

दुनिया भर में जहाजों की सुरक्षा और समुद्री अनुशासन करने वाली संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने भी इस घटना के लिए अमेरिका की तीखी आलोचना की. IMO ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के पास हुई इस घटना में जहाज पर एक प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिससे जहाज में आग लग गई और तीन नाविकों की मौत हो गई.

IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंग्वेज ने कहा कि वह किसी भी पक्ष की ओर से की गई ऐसी किसी भी हरकत की ‘कड़ी निंदा करते हैं, जिससे नाविकों की जान और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा को खतरा हो. यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है. मेरी संवेदनाएं उन तीन नाविकों के परिवारों के साथ हैं, जिनकी जान चली गई और उन सभी लोगों के साथ भी जो क्रू सदस्यों के बारे में खबर का इंतजार कर रहे हैं.

दरअसल, कुछ दिन पहले ओमान तट के पास पलाऊ-झंडे वाले टैंकर एमटी सेटेबेलो पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए थे. जहाज पर कुल 24 भारतीय क्रू मेंबर्स सवार थे, जिनमें से 21 को बचा लिया गया, जबकि तीन लापता नाविकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. मारे गए नाविकों की पहचान डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश के रूप में हुई है.

इस घटना के बाद भारत ने वाशिंगटन के साथ कड़ा विरोध दर्ज कराया और नई दिल्ली में अमेरिकी चार्ज डी-एफेयर्स को तलब किया. विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस घटना पर भारत का सख्त रुख दोहराते हुए पहले ही कह दिया था कि भारतीय चालक दल के सदस्यों को ले जाने वाले मर्चेंट जहाजों पर ऐसे हमले तुरंत बंद होने चाहिए. उन्होंने क्षेत्र में शांति और स्थिरता की जल्द वापसी सुनिश्चित करने के लिए बातचीत और कूटनीति का सहारा लेने का आह्वान किया है.

उधर, अमेरिकी सेना ने इस हमले पर अपनी सफाई देते हुए दावा किया है कि ‘एमटी सेटेबेलो’ को तब निशाना बनाया गया जब वह ईरान से जुड़े जहाजों पर लगे ब्लॉकेड को लागू करने के दौरान अमेरिकी बलों द्वारा जारी निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था.

इस बीच भारत सरकार ने संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने और भारतीय नौसेना व अंतरराष्ट्रीय समुद्री अधिकारियों के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए हैं.

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