बीते कुछ टाइम से हंता वायरस सुर्खियों में हैं। इस डेडली वायरस की वजह से हुई क्रूज शिप में मौतों ने लोगों को डरा रखा है। हालांकि हंता वायरस के एक भी मामले इंडिया में देखने को नहीं मिले हैं और अर्जेंटीना के क्रूज शिप पर हुई मौत के बाद मौजूद बाकी यात्रियों को भी क्वारंटीन कर जांच की जा रही है। ये वायरस सदियों पुराना है और इसके लक्षण दिखने में कई बार 2 महीने तक का समय लग सकता है। दरअसल, हंता वायरस बेहद खतरनाक है और ये चूहे और गिलहरियों जैसे जानवरों से फैलता है। इन जानवरों के मल, पेशाब और लार में ये वारयस होता है और इसके संपंर्क में आते ही इंसान वायरस की चपेट में आ जाता है।
हंता वायरस के लक्षण
हंता वायरस के शरीर में लक्षण दिखने में एक से आठ हफ्ते तक का समय लग जाता है। लेकिन लक्षण दिखने के बाद तेजी से हालत बिगड़ती और मरीज की कई मामलों में मौत हो जाती है। WHO के मुताबिक हंता वायरस की चपेट में आने वाले 35-40 प्रतिशत मरीजों की मौत 6 हफ्तों में हो जाती है। हंता वायरस से संक्रमित होने पर शुरुआती लक्षणों में बुखार, मसल्स में दर्द, सिर दर्द, मितली, उल्टी और डायरिया शामिल है। चूंकि ये लक्षण कई बीमारियों और सामान्य बीमारियों से जुड़े होते हैं इसीलिए हंता वायरस को डिटेक्ट करना मुश्किल हो जाता है। हालांकि नया हंता वायरस इंफेक्शन तेजी से फैलना है और हार्ट, फेफड़े कुछ ही दिन में फेल हो जाते हैं। संक्रमण की वजह से फेफड़ों में पानी भर जाता है और सांस लेने में तकलीफ होती है जिससे मरीज की मौत हो जाती है। ये हंता वायरस का HPS (हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम) है जो कि नॉर्थ और साउथ अमेरिका में फैलता है।
कैसे फैलता है वायरस
इस वायरस से इंसान के शरीर में पहुंचने का कारण ज्यादातर चूहे के पेशाब या बीट से हवा में मौजूद कणों को सांस के जरिए अंदर लेने से इंफेक्टेड होते हैं। जॉन लेडनिकी, Ph.D., जो EPI के मेंबर और UF कॉलेज ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड हेल्थ प्रोफेशन्स में रिसर्च प्रोफेसर हैं, ने बताया कि वायरस बंद जगहों में फैल सकता है। संक्रमित चूहे के संपंर्क में आई गई चीजों के पास जाकर सांस लेने से ये इंसान के अंदर पहुंचते हैं।
सांस लेने में तकलीफ हो तो क्या करें
सांस लेने में तकलीफ की कई वजह जिम्मेदार हो सकती है। लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि अगर किसी को फेफड़ों या दिल से जुड़ी किसी बीमारी का पता नहीं है और ऑक्सीजन लेवल तेजी से नीचे गिर रहा और 88 पर पहुंच रहा तो आपको नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट में जाना चाहिए। फेफड़ों की किसी भी समस्या की वजह से सांस लेने में तकलीफ के साथ आमतौर पर खांसी भी होती है। खांसी के बिना, फेफड़ों से जुड़ी सांस लेने में तकलीफ नहीं होती है।
