नहाते समय गर्दन पर जमी काली परत को हम अक्सर ‘मैल’ समझकर स्क्रब या साबुन से रगड़कर साफ करने की कोशिश करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं गर्दन का यह कालापन या काली लाइन सिर्फ हाइजीन की कमी नहीं, बल्कि कई बार शरीर के भीतर पनप रहे कई गंभीर रोगों का भी एक अलार्म हो सकते हैं। मेडिकल भाषा में इसे ‘एकेंथोसिस निगरिकन्स’ (Acanthosis Nigricans) नाम से पहचाना जाता है। जो शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस, हार्मोनल असंतुलन और यहां तक कि डायबिटीज जैसी बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। जब हमारा शरीर अंदरूनी समस्याओं से जूझ रहा होता है, तो वह त्वचा के जरिए हमें चेतावनी देता है, जरूरत है इस ‘ब्लैक रिंग’ को गंभीरता से लेने की, क्योंकि यह केवल सुंदरता का नहीं, बल्कि आपकी सेहत का भी सवाल है। इस समस्या को अच्छी तरह समझने के लिए हमने एक नहीं बल्कि 4 तरह के मेडिकल एक्सपर्ट्स (त्वचा रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, आंतरिक चिकित्सक और मधुमेह विशेषज्ञ) से बात की।
1.त्वचा रोग विशेषज्ञ
फोर्टिस अस्पताल (गुड़गांव) की त्वचा विशेषज्ञ डॉ. रश्मि शर्मा कहती हैं कि गर्दन पर काली रेखाएं या रंग का काला पड़ना कई बार ‘एकेंथोसिस निगरिकन्स’ (Acanthosis Nigricans) नामक स्थिति का संकेत हो सकता है, जो किसी अंदरूनी बीमारी से जुड़ा हो सकता है। इसके संभावित कारणों में डायबिटीज का नाम सबसे पहले लिया जाता है। जिसमें शरीर में इंसुलिन सही से काम न करने पर गर्दन, बगल की त्वचा आमतौर पर काली पड़नी शुरू हो सकती है। इसके अलावा मोटापा, हार्मोन संबंधी समस्याएं जैसे PCOS या थायरॉयड भी इसका कारण बन सकती हैं।
उपाय
डॉ. रश्मि कहती हैं कि इस समस्या से निपटने के लिए व्यक्ति को अपनी डाइट में संतुलित आहार, चीनी और जंक फूड का कम सेवन और वजन नियंत्रित में रखना चाहिए। जिसके लिए वह नियमित रूप से व्यायाम, डॉक्टर से परामर्श लेकर डायबिटीज, थायरॉयड या हार्मोन टेस्ट करवाएं। डॉक्टर की सलाह के बाद ही दवाइयां या मेडिकेटेड क्रीम का उपयोग करें, खुद से इलाज न करें। यदि गर्दन का कालापन तेजी से बढ़ रहा है या खुजली/मोटापन/थकान के साथ है, तो डॉक्टर से जरूर मिलें।
2.स्त्री रोग विशेषज्ञ
फोर्टिस अस्पताल (शालीमार बाग) की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. उमा वैद्यनाथन कहती हैं कि गर्दन के कालेपन के पीछे संभावित कारण अक्सर ‘एकेंथोसिस निगरिकन्स’ होता है, जो महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन की ओर संकेत करता है। यह स्थिति प्रायः पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम), इंसुलिन रेजिस्टेंस और मोटापे से जुड़ी होती है। जिन महिलाओं में अनियमित माहवारी, वजन बढ़ना, मुंहासे, चेहरे या शरीर पर अत्यधिक बाल होते हैं, उनमें यह त्वचा परिवर्तन एक प्रारंभिक चेतावनी संकेत के रूप में देखा जा सकता है।
उपाय
डॉ. उमा इस समस्या से बचने के लिए इसके मूल कारण की पहचान और उपचार को जानने की सलाह देती हैं, जिसमें हार्मोनल प्रोफाइल, ब्लड शुगर और इंसुलिन स्तर की जांच शामिल होती है। वजन नियंत्रण, संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि जैसी जीवनशैली में बदलाव से इस स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।
3. फिजिशियन
फोर्टिस अस्पताल (शालीमार बाग) के फिजिशियन डॉ. पवन कुमार गोयल त्वचा के कालेपन के बढ़ने के पीछे के संभावित कारणों में विटामिन B12, विटामिन D की कमी या शरीर में लंबे समय तक बनी रहने वाली हल्की सूजन को मानते हैं। सामान्य स्वास्थ्य जांच के दौरान इन कारणों की नियमित रूप से जांच की जाती है। वर्तमान समय में प्री-डायबिटीज या मेटाबॉलिक सिंड्रोम भी इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण होता है।
उपाय
समस्या के पीछे छिपे असल कारण को जानने के लिए डॉक्टर अकसर ब्लड शुगर प्रोफाइल, थायरॉयड फंक्शन टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, इंसुलिन स्तर और विटामिन के स्तर की जानकारी के लिए इन जांचों को करवाने की सलाह देते हैं। रोग के उपचार का उद्देश्य केवल त्वचा के रंग में बदलाव लाना नहीं होता, बल्कि सेहत से जुड़ी गड़बड़ियों चाहे वे मेटाबॉलिक, हार्मोनल या पोषण संबंधी हों, उन्हें ठीक करना भी होता है। इस समस्या को ठीक करने के लिए डॉक्टर रोगियों को वजन नियंत्रण, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और नियमित स्वास्थ्य निगरानी की सलाह देते हैं।
4. एंडोक्रिनोलॉजिस्ट
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट की मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. छवि अग्रवाल कहती हैं कि लंबे समय तक शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ा रहने से त्वचा की कोशिकाओं की वृद्धि को उत्तेजना मिलती है, जिससे शरीर के मोड़ों पर त्वचा मोटी और काली हो जाती है। डायबेटोलॉजिस्ट इसे प्री-डायबिटीज या टाइप 2 डायबिटीज का प्रारंभिक चेतावनी संकेत मानते हैं। इसके अलावा अनियंत्रित या अज्ञात टाइप 2 डायबिटीज त्वचा में इस बदलाव को तेज करता है, जिससे गर्दन का काला पड़ना क्लिनिकल जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत बन जाता है। मोटापा, डिस्लिपिडीमिया और उच्च रक्तचाप, जो अक्सर डायबिटीज रोगियों में पाए जाते हैं- इंसुलिन रेजिस्टेंस और त्वचा संबंधी लक्षणों को और बढ़ा देते हैं।
उपाय
उपचार का उद्देश्य इंसुलिन की संवेदनशीलता को बेहतर बनाना होता है, जिसमें संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और डायबेटोलॉजिस्ट की सलाह अनुसार मेटफॉर्मिन जैसी एंटी-डायबिटिक दवाएं शामिल होती हैं। इसके अलावा फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज, HbA1c और फास्टिंग इंसुलिन जैसे परीक्षण ग्लाइसेमिक गड़बड़ियों की समय रहते पहचान करने में मदद करते हैं और उन्हें डायबिटीज में बदलने से रोकते हैं। इंसुलिन का स्तर सामान्य होने पर त्वचा में होने वाले बदलाव अक्सर धीरे-धीरे कम हो जाते हैं।
