जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को झटका: हाईकोर्ट ने पूर्व के फैसले को पलटते हुए दिया सरेंडर का आदेश, तीन सप्ताह का समय

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बिलासपुर। एनसीपी के नेता रामअवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। पूर्व के आदेश को पलटते हुए हाई कोर्ट ने सीबीआई की अपील को स्वीकार कर लिया है।

सीबीआई की अपील स्वीकार करने के साथ ही हत्याकांड के प्रमुख आरोपत अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई और जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अलग-अलग याचिका दायर कर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करने के लिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को निर्देशित किया है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जग्गी हत्याकांड की फाइल फिर से खोलकर सुनवाई की जा रही है। याचिकाकर्ता सतीश जग्गी के अधिवक्ता बीपी शर्मा ने डिवीजन बेंच को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए वापस छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भेज दिया है।

सीबीआई की ओर से उपस्थित अधिवक्ता वैभव ए. गोवर्धन और राज्य की ओर से उपस्थित उप महाधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडे ने संयुक्त रूप से निवेदन किया कि राज्य ने 31 मई 2007 को आवेदन पेश कर निचली अदालत द्वारा पारित अमित जोगी के बरी करने के फैसले के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी थी।

उक्त आवेदन को इस न्यायालय की समन्वय पीठ ने 18 अगस्त 2011 को इस आधार पर खारिज कर दिया था, सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे मामले में राज्य द्वारा दायर अपील की अनुमति के लिए आवेदन स्वीकार्य नहीं है।

चार जून, 2003 को एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने 31 लोगों को आरोपित बनाया था। बाद में बलटू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को दोषी करार दिया गया था।

हालांकि बाद में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जिस पर अमित के पक्ष में स्टे ऑर्डर है।

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