कबीरधाम। जिले में धान खरीदी में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए धान खरीदी प्रभारी विवेक चंद्राकर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी पर 70 लाख रुपये से अधिक की हेराफेरी का आरोप है, जिससे शासन को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। जानकारी के अनुसार, यह मामला सेवा सहकारी समिति मर्यादित के अंतर्गत धान उपार्जन केंद्र पेण्ड्रीकला का है। इस संबंध में शिकायत राजेन्द्र कुमार डाहिरे, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक राजनांदगांव शाखा कुण्डा द्वारा दर्ज कराई गई थी।
जांच में खुला बड़ा घोटाला
शिकायत के आधार पर वर्ष 2025-26 के दौरान धान खरीदी केंद्र का निरीक्षण किया गया। जांच टीम ने पाया कि 12 जनवरी की स्थिति में कुल 23,319.20 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज की गई थी। इसमें से 3,880 क्विंटल धान का उठाव हो चुका था, जबकि शेष 19,439.20 क्विंटल धान केंद्र में मौजूद होना चाहिए था। लेकिन मौके पर जांच के दौरान पाया गया कि केंद्र में अपेक्षित मात्रा से काफी कम धान मौजूद था। जांच में कुल 2,272 क्विंटल धान की कमी सामने आई। इस कमी का शासकीय मूल्य 70 लाख 43 हजार 200 रुपये आंका गया है।
रिकॉर्ड में हेराफेरी कर किया गबन
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी प्रभारी विवेक चंद्राकर ने तौल पत्रक और रजिस्टर में कूट रचना (फर्जीवाड़ा) कर धान की हेराफेरी की। इस तरह से रिकॉर्ड में हेरफेर कर बड़े पैमाने पर सरकारी धान का गबन किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना कुण्डा में अपराध क्रमांक 15/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं—316(3), 316(5), 318(4), 336(3), 338 और 340—में अपराध दर्ज किया गया। पुलिस द्वारा पूछताछ के दौरान आरोपी ने रिकॉर्ड में हेराफेरी करने और धान गबन करने की बात स्वीकार कर ली। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
जांच में जुटी पुलिस, अन्य पहलुओं की भी पड़ताल
पुलिस अब इस मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस घोटाले में अन्य कोई कर्मचारी या अधिकारी शामिल तो नहीं है।
टीम का सराहनीय योगदान
इस कार्रवाई में उप निरीक्षक जयराम यादव, प्रधान आरक्षक मुकेश राजूपत, संजय मरावी, जयंती पटेल और जेठूराम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक ने टीम की कार्रवाई की सराहना की है। इस घटना के बाद जिले में सहकारी समितियों और धान खरीदी केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन अब ऐसे मामलों पर सख्ती बरतने की तैयारी में है, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को रोका जा सके।
