इंदौर में दूषित पानी मामला: हाईकोर्ट का आदेश, फाइलें रखें सुरक्षित

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इंदौर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इंदौर के जल त्रासदी मामले में प्रशासन को प्रकोप से जुड़े सभी मूल दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई थी कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। इसके साथ ही अदालत ने सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं और साफ पानी की आपूर्ति संबंधी अंतरिम आदेशों का पालन जारी रखने को कहा है। वहीं प्रशासन ने जवाबदेही तय करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बना दी है।

दस्तावेजों में गड़बड़ी का डर

हाई कोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की पीठ भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने डर जताया कि भागीरथपुरा में पानी की पाइपलाइन बिछाने के टेंडर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट जैसे असली दस्तावेजों में गड़बड़ी की जा सकती है।

दस्तावेज और फाइलें सुरक्षित रखने के निर्देश

मंगलवार को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बाद में जारी आदेश में अदालत ने इंदौर के कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर को निर्देश दिया कि वे पाइपलाइन बिछाने के टेंडर और पानी की जांच रिपोर्ट जैसे सभी जरूरी दस्तावेजों और फाइलों को सुरक्षित रखें।

मांगी नई प्रगति रिपोर्ट

अदालत ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया कि वह 6 जनवरी को दिए गए शुरुआती निर्देशों का सख्ती से पालन करती रहे। मामले में एक नई प्रगति रिपोर्ट पेश करे। अदालत ने अपने निर्देशों में भागीरथपुरा में मरीजों के लिए मुफ्त इलाज का इंतजाम करने, लोगों को साफ पानी देने और गंदे जलस्रोतों के इस्तेमाल पर रोक लगाने को कहा है।

जल सुरक्षा योजना लागू करने के आदेश

इसके साथ ही अदालत ने पानी की जांच और सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने, पाइपलाइन के ढांचे को सुधारने और भविष्य के लिए जल सुरक्षा योजना लागू करने के भी आदेश दिए गए हैं। हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को तय की है और मुख्य सचिव अनुराग जैन को उस दिन भी ऑनलाइन पेश होने का निर्देश दिया है।

सरकार बोली- बनाई है जांच समिति

मध्य प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट को जानकारी दी कि भागीरथपुरा में पानी गंदा होने की जांच करने और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। समिति जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय करेगी। वहीं दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत में आरोप लगाया कि समिति केवल एक दिखावा है। इसे केवल लीपापोती करने के लिए बनाया गया है।

जांच में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि

भागीरथपुरा में दूषित पानी से लोगों के बीमार होने की शुरुआत दिसंबर के अंत में हुई थी। अधिकारियों ने बताया कि इलाके के 51 नलकूपों में गंदा पानी पाया गया और जांच में ई-कोलाई बैक्टीरिया होने की पुष्टि हुई। इसी बैक्टीरिया की वजह से वहां बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े। जांच में यह भी सामने आया कि नगर निगम की पानी की पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण उसमें शौचालय के सीवर का गंदा पानी मिल गया था।

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