रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में क्रिकेट सट्टे का अवैध कारोबार अमरबेल की तरह फ़ैल गया है। आईपीएल की तारीख नज़दीक आते ही सटोरियों में हलचल और भी ज्यादा बढ़ गई है। । सट्टा किंग भले ही छुप गए हों, लेकिन उनके गुर्गे गली-मोहल्लों, किराए के फ्लैटों और होटलों से बेखौफ होकर सट्टा खिला रहे हैं। जनता से रिश्ता लगातार पुलिस को इस अवैध गतिविधि के प्रति आगाह करता रहा है, इसके बावजूद शहर के कई इलाकों में क्रिकेट सट्टा धड़ल्ले से संचालित हो रहा है। हालांकि पुलिस ने विगत माह लगातार सट्टा माफियाओं को पकडक़र जेल की सलाखों में डाला लेकिन जमानत मिलते ही फिर से नेटवर्क सक्रिय कर लिया। अधिकांश सट्टा माफिया अंदर बाहर की परवाह नहीं करते और उनका सट्टे का कारोबार बेधडक़ चलता रहता है। पुलिस ने सट्टा माफियाओं के नेटवर्क को अंतिम छोर तक वार कर बंद कराना होगा। तभी युवा पीढि़ इस कैंसर रोगी बीमारी से दूर हो सकती है। अदालत सट्टा माफिया को तुरंत जमानत दे देती है जिसके कारण भय और कानूनी डर सट्टा माफियाओं पर खत्म हो गया है।
मोहल्ले सहित पॉश कॉलोनियों में सट्टे का नेटवर्क : शुक्रवारी बाजार, गोगांव, गुढिय़ारी, समता कॉलोनी, कटोरातालाब, शंकरनगर, शैलेन्द्र नगर कटोरा तालाब, न्यू राजेंद्र नगर अमलीडीह भाटागांव तात्यापारा स्टेशन रोड समेत राजधानी की कई पॉश कॉलोनियों में किराए के फ्लैटों से सट्टे का कारोबार चल रहा है। सटोरिए ऑनलाइन एप के जरिए क्रिकेट सट्टा संचालित कर रहे हैं, जिनका सीधा संपर्क इंटरनेशनल खाईवालों से बताया जा रहा है वे उन्ही के माध्यम से राजधानी रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में अपना नेटवर्क फैलाये हुए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सट्टेबाजों और खाईवालों के तार मुंबई, दिल्ली जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ दुबई तक जुड़े हैं। किसी भी विवाद या रकम फंसने की स्थिति में खाईवाल अपने गुर्गों को सामने कर उनके माध्यम से लोगों को धमकाने में पीछे नहीं रहते।
मोबाइल-लैपटॉप से बिंदास लेनदेन : सटोरिये मोबाइल, लैपटॉप और महादेव एप के जरिए बिंदास रूप से करोड़ों रुपये के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर लेते हैं। सटोरिए इंस्टेंट बैंक अकाउंट का इस्तेमाल करने लगे हैं। जो 5 से 10 मिनट में खुल जाते हैं। वेरिफिकेशन से पहले ही इन खातों में लाखों का लेनदेन कर अकाउंट बंद कर देते है जिससे ये पुलिस के पकड़ में नहीं आ पते या पकड़ में आने में काफी वक्त लग जाता है हालांकि अब बैंक वाले भी इन सब बातो को देखते हुए अलर्ट हो गए हैं।
किराए के फ्लैट और होटल मुख्य केंद्र : सटोरिये अब किसी एक ठिकाने से सट्टा संचालित नहीं करते बल्कि जगह बदल-बदल कर अलगअलग कालोनियों या मोहल्लो में किराये का मकान या फ्लैट लेकर अपना काम करते हैं। हाल में ही पहके गए अधिकतर सटोरिये इसी तरह से सट्टा संचालित करते मिले थे। मतलब अब सटोरिए हाई-स्पीड इंटरनेट और आधुनिक संसाधनों के साथ किराए के फ्लैटों और होटलों से सट्टा संचालित कर रहे हैं। कटोरातालाब क्षेत्र का अनिल आलू पहले पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है, लेकिन बाद में भूमिगत होकर बड़ा सट्टा कारोबारी बन गया।
गांव-गांव तक पहुंचा सट्टा : सट्टे का नेटवर्क अब शहरों तक सीमित नहीं रहा। तिल्दा, भाटापारा, धमतरी, कांकेर, जगदलपुर, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव समेत छोटे कस्बों और गांवों तक खाईवालों के गुर्गे घूम-घूमकर सट्टा खिला रहे हैं। रायपुर, दुर्ग-भिलाई, जगदलपुर और बिलासपुर के बड़े खाईवाल इस पूरे नेटवर्क को आईडी उपलब्ध कराते हैं। पुलिस वालो के पाहुवह से दूर भी होते जा रहे हैं ये सटोरिये क्योकि बड़े नेताओ का हाथ इन पर होने लगा है। छुटभैये नेता तो इनका साथ देते ही थे अब चंदा और पार्टी फण्ड के नाम से बड़े नेता भी पीछे से इनके सपोर्ट में दिखते हैं।
