इंदौर में GBS का खतरा: गंदा पानी बढ़ा रहा है बीमारी का जोखिम

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इंदौर। इंदौर का भागीरथपुरा इलाका इस समय एक ऐसी स्वास्थ्य आपदा से जूझ रहा है, जिसने चिकित्सा विशेषज्ञों की भी चिंता बढ़ा दी है। दूषित पानी के सेवन से शुरू हुआ उल्टी-दस्त का सिलसिला अब गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barré Syndrome – GBS) जैसी खतरनाक न्यूरोलॉजिकल बीमारी में तब्दील हो चुका है। साल 2025 के अंत से शुरू हुआ यह प्रकोप अब तक कई परिवारों को उजाड़ चुका है।

आंकड़ों में इंदौर त्रासदी

इंदौर प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर अब तक 6 मौतों की पुष्टि की है, लेकिन स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार यह संख्या 16 तक जा पहुंची है।

  • लगभग 200 लोग इस संक्रमण की चपेट में आए।
  • 150 से अधिक मरीज अब भी शहर के विभिन्न अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
  • भागीरथपुरा की निवासी पार्वती बाई को 27 दिसंबर को सामान्य उल्टी-दस्त हुए, लेकिन 1 जनवरी को आई रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया उन्हें GBS हो चुका था। फिलहाल वे ICU में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं।

क्या है GBS?

चिकित्सकों के अनुसार, GBS एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) भ्रमित होकर अपनी ही नसों (Nervous System) पर हमला कर देती है।

बीमारी का क्रम:

  • दूषित पानी से पेट में गंभीर संक्रमण (Infection)।
  • हाथ-पैर में झुनझुनी, सुन्नपन और फिर अचानक बढ़ती कमजोरी।
  • नसों को नुकसान पहुंचने से लकवा (Paralysis), बोलने में असमर्थता और अंततः सांस लेने में तकलीफ।
  • समय पर इलाज न मिलने पर 10% मामलों में यह घातक साबित होती है।

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इलाज आम आदमी की पहुंच से बाहर

GBS का इलाज न केवल जटिल है, बल्कि बेहद खर्चीला भी है:

  • एक विशेष इंजेक्शन की कीमत लगभग ₹30,000 है।
  • गंभीर मरीजों के लिए इलाज का खर्च ₹10 लाख से ₹15 लाख तक पहुंच सकता है।
  • कई मरीजों को 10 या उससे अधिक इंजेक्शन और हफ्तों तक वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता होती है। हालांकि, राहत की बात यह है कि समय पर इलाज मिलने से 70% मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।

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