किसान कमल पटेल की ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से ओडिशा तक बढ़ी मांग, पारंपरिक खेती से हुई आय में कई गुना वृद्धि

प्रादेशिक मुख्य समाचार

महासमुंद। कहते हैं कि अगर सोच नई हो और तरीका सही, तो खेती सिर्फ गुज़ारा नहीं बल्कि समृद्धि का रास्ता बन जाती है। ऐसा ही कर दिखाया है विकासखण्ड बसना के ग्राम बंसुलीडीह के प्रगतिशील किसान कमल पटेल ने। पारंपरिक खेती से सीमित आय पाने वाले कमल ने जब आधुनिक तकनीक और उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का मदद मिला तो उनकी मेहनत ने उन्हें लाखों की कमाई तक पहुंचा दिया।

पहले श्री कमल पटेल अपनी जमीन पर पारंपरिक रूप से धान की खेती करते थे, जिससे प्रति एकड़ लगभग 15 से 17 क्विंटल उत्पादन मिलता था और आय सीमित रहती थी। लेकिन बदलाव की सोच के साथ उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत ग्राफ्टेड बैंगन की खेती अपनाई। उन्होंने अपनी कुल 0.40 हेक्टेयर भूमि में उद्यानिकी फसल का उत्पादन शुरू किया, जिसमें पूरी भूमि सिंचित है। आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाते हुए उन्होंने अपने खेत में ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया। इन तकनीकों के प्रयोग से पानी की बचत और फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी वृद्धि हुई।

पटेल बताते है कि वे पहले अपनी भूमि में पारंपरिक रूप से धान की खेती करते थे, जिसमें लगभग 21 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त होता था और आय भी सीमित थी। बाद में उन्होंने शासन के उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती शुरू की। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के कारण उन्हें लगभग 50 टन तक उत्पादन प्राप्त हुआ, जिसे उन्होंने सरायपाली और ओडिशा के बाजारों में बिक्री किया। बैंगन का औसत विक्रय मूल्य लगभग 12 रुपये प्रति किलोग्राम प्राप्त हुआ, जिससे उन्हें अच्छी आय हुई।

इस खेती में प्रति एकड़ लगभग 1,30,000 रुपये की इनपुट लागत, 50,000 रुपये श्रमिक लागत तथा लगभग 20,000 रुपये अन्य खर्च आया। सभी खर्चों को निकालने के बाद श्री कमल पटेल को लगभग 3,50,000 रुपये की कुल बचत प्राप्त हुई। इस प्रकार पारंपरिक खेती की तुलना में उनकी आय में कई गुना वृद्धि हुई। उद्यानिकी खेती से उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे उनके सामाजिक स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आया है। वे निरंतर नई कृषि तकनीकों को अपनाने तथा उन्नत पद्धतियों की जानकारी प्राप्त करने के लिए उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के संपर्क में रहते हैं और विभाग की योजनाओं का लाभ लेते रहते हैं।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *