रायपुर। कोंडागांव की एक आदिवासी महिला और उसके पति को एक ही गोत्र में विवाह करने पर सामाजिक बहिष्कार झेलना पड़ा। समाज ने दंपती पर अलग रहने का दबाव बनाया, गांव से निकालने की धमकी दी और सामाजिक बहिष्कार कर दिया। दो वर्षों तक दंपती अपमान, डर और तिरस्कार के बीच जीवन जीने को मजबूर रहा। महिला ने बताया कि बहिष्कार के बाद उनसे बातचीत बंद कर दी गई, त्योहारों और सामाजिक कार्यक्रमों में प्रवेश रोक दिया गया। बच्चों को स्कूल में ताने सुनने पड़े और राशन लाने तक में परेशानी हुई। गांव में रहते हुए भी दोनों को अलग-थलग कर दिया गया। समाज के लोगों ने स्पष्ट कह दिया था कि या तो अलग रहो या गांव छोड़ दो।
राज्य महिला आयोग का दखल
मामला राज्य महिला आयोग तक पहुंचने के बाद दंपती को राहत मिली। आयोग के निर्देश पर सुनवाई के दौरान अनावेदकगणों ने आवेदिका को 60 हजार रुपये लौटाए। पति ने साथ रहने की सहमति दी। सभी ने विवाह में बाधा न डालने और सामाजिक बहिष्कार न करने का आश्वासन दिया। उल्लंघन की स्थिति में एफआईआर दर्ज कराने का अधिकार रहेगा।
