भागीरथपुरा दूषित पानी कांड: कोर्ट ने आयोग से रिपोर्ट मांगी, नगर निगम को चेतावनी

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इंदौर। भागीरथपुरा मामले में हाई कोर्ट द्वारा गठित न्यायिक आयोग को सोमवार को अपनी जांच रिपोर्ट पेश करना था, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सका। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हमने एक माह का अतिरिक्त समय दिया, दस्तावेज भी दिलवा दिए फिर भी रिपोर्ट पेश नहीं हुई। कोर्ट ने आयोग से कहा है कि वह 22 अप्रैल तक रिपोर्ट पेश कर दे। मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने शहर की सांई कृपा कॉलोनी में नलकूप से दूषित पानी निकलने की बात उठाई। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम नहीं चाहते कि शहर में कोई दूसरी भागीरथपुरा बने। नगर निगम सतर्कता बरते और संबंधित क्षेत्र में नलकूपों के पानी की सतत सेंपलिंग करे। भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से 36 लोगों की मौत को लेकर हाई कोर्ट में चल रही पांच अलग-अलग याचिकाओं पर सोमवार को एक साथ सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग गठित किया है। पिछली सुनवाई पर आयोग ने अंतरिम रिपोर्ट पेश करते हुए कहा था कि चूंकि निगम से पूरे दस्तावेज नहीं मिले हैं, इसलिए जांच के अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच पाना संभव नहीं है। इस पर कोर्ट ने निगम से कहा था कि वह आयोग को सभी चाहे गए दस्तावेज उपलब्ध कराए। सोमवार की सुनवाई में निगम की ओर से बताया गया कि सभी दस्तावेज आयोग को उपलब्ध करवा दिए गए थे। कोर्ट ने आयोग को रिपोर्ट पेश करने के लिए 22 अप्रैल तक का समय दिया है। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट मनीष यादव ने भी पक्ष रखा।

दूसरा भागीरथपुरा नहीं बनना चाहिए

सुनवाई के दौरान सांई कृपा कालोनी में नलकूप से दूषित पानी आने का मुद्दा उठा। निगम की ओर से एडवोकेट ऋषि तिवारी ने कोर्ट को बताया कि यह एक निजी नलकूप का मामला है। नगर निगम पूरी सांईकृपा कालोनी में शुद्ध पानी वितरित कर रहा है। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम नहीं चाहते कि शहर में कहीं कोई दूसरा भागीरथपुरा बने। निगम को अतिरिक्त सतर्कता बरतना चाहिए। निगम संबंधित क्षेत्र में नलकूपों के पानी की सतत जांच करे।

निश्शुल्क नहीं मिल रहा पानी

सुनवाई के दौरान एडवोकेट मोहनसिंह चंदेल ने कहा कि कोर्ट ने निगम से भागीरथपुरा में रहवासियों को निश्शुल्क पानी देने के लिए कहा था, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। रहवासियों को इसके लिए पैसा चुकाना पड़ रहा है। इस पर कोर्ट ने कहा कि आपको जो भी कहना है वह आप शपथ पत्र पर आयोग के सामने कहें।

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