गणतंत्र दिवस पर कोरबा कलेक्ट्रेट में हड़कंप: नगर सेना के जवान ने जहर खाया, अफसरों पर लगाए गंभीर आरोप

प्रादेशिक मुख्य समाचार

कोरबा | छत्तीसगढ़ के औद्योगिक जिले कोरबा से आज गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। जहाँ एक ओर पूरा देश तिरंगे को सलाम कर रहा था, वहीं कोरबा कलेक्ट्रेट परिसर में नगर सेना (होमगार्ड) के एक जवान ने ज़हर खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त करने की कोशिश की। इस आत्मघाती कदम के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

घटना का विवरण : कलेक्ट्रेट परिसर बना ‘क्राइम सीन’ – मिली जानकारी के अनुसार, नगर सेना के जवान संतोष पटेल ने सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में ही अज्ञात विषाक्त पदार्थ (जहर) का सेवन कर लिया। देखते ही देखते उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और वे जमीन पर गिर पड़े। वहां मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने जब उन्हें तड़पते देखा, तो तुरंत आनन-फानन में उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल भर्ती कराया गया। फिलहाल जवान की हालत नाजुक बनी हुई है और वे डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं।

सुसाइड नोट में प्रताड़ना का खुलासा : पुलिस को जवान के पास से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जो विभाग के भीतर चल रही खींचतान और मानसिक प्रताड़ना की ओर इशारा कर रहा है। सुसाइड नोट के मुख्य बिंदु:

  • ​जवान ने डिविजनल कमांडेंट और कोरबा कमांडेंट पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का सीधा आरोप लगाया है।
  • ​नोट में विभागीय राजनीति और दबाव का जिक्र किया गया है, जिसने उसे इस चरम कदम को उठाने पर मजबूर किया।

क्या है पूरा विवाद? (विशाखा समिति का एंगल) – सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी घटना की जड़ें कुछ दिन पहले हुई एक बड़ी कार्रवाई से जुड़ी हैं। बताया जा रहा है कि जिला सेनानी के खिलाफ महिला सैनिकों ने विशाखा समिति (कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने वाली समिति) में शिकायत दर्ज कराई थी। इस विवाद के बाद जवान संतोष पटेल को सेवा से बर्खाश्त कर दिया गया था। अपनी नौकरी जाने और विभाग में हुए अपमान से आहत होकर संतोष ने मौत को गले लगाने का फैसला किया।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया : घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी अस्पताल और कलेक्ट्रेट में तैनात हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और सुसाइड नोट की सत्यता की पुष्टि की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि जवान को किन परिस्थितियों में बर्खास्त किया गया और प्रताड़ना के आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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