मणिपुर। हिंसा की लंबी पृष्ठभूमि वाले मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में एक बार फिर तनाव बढ़ने की खबर है। कुकी और नगा समुदायों के बीच बढ़ते विवाद का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में करीब एक सप्ताह से स्कूल और बाजार बंद बताए जा रहे हैं, जबकि सड़क मार्ग बाधित होने से पहाड़ी जिलों में आवाजाही और जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित होने का दावा किया गया है।
हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांगपोकपी के कुछ गांवों में स्थानीय लोगों ने चीनी की कीमत ₹400 से ₹450 प्रति किलो तक पहुंचने का दावा किया है।
गांवों में बढ़ी मुश्किल, खेतों में जाने से भी डर
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, सुरक्षा को लेकर बने माहौल के कारण कई ग्रामीण घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। खेतों में काम करने जाने को लेकर भी लोगों में डर बताया जा रहा है।
एक स्थानीय निवासी के अनुसार, जिला मुख्यालय में जरूरी सामान अभी उपलब्ध है, लेकिन दूरदराज के गांवों में आपूर्ति की स्थिति ज्यादा खराब है। मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में अस्पताल या एयरपोर्ट तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है।
आम लोगों के सामने ये दिक्कतें
- कई इलाकों में स्कूल और बाजार बंद।
- सड़क और हाईवे पर नाकेबंदी की खबर।
- जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित।
- ग्रामीण इलाकों में खाद्य सामग्री के दाम बढ़ने का दावा।
- मेडिकल इमरजेंसी में आवाजाही मुश्किल होने की बात।
- खेतों में जाने से ग्रामीणों के डरने की जानकारी।
हाईवे पर चेकपॉइंट, आवाजाही को लेकर चिंता
उखरुल, सेनापति, तामेंगलोंग और चंदेल सहित कुछ पहाड़ी इलाकों में प्रमुख सड़कों पर चेकपॉइंट और नाकेबंदी होने का दावा किया गया है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ मार्गों पर निजी वाहनों की आवाजाही सुरक्षा एस्कॉर्ट के बिना मुश्किल बताई जा रही है। मेडिकल जरूरत या एयरपोर्ट जाने वाले कुछ लोगों को स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने की बात भी सामने आई है।
हालांकि, अलग-अलग इलाकों में स्थिति अलग हो सकती है और इन दावों की आधिकारिक स्थिति संबंधित प्रशासनिक जानकारी से ही स्पष्ट होगी।
चावांगकिनिंग में गोलीबारी और आगजनी
कांगपोकपी के चावांगकिनिंग लियांगमाई गांव में बुधवार को कई घरों में आग लगाए जाने की सूचना सामने आई। कुछ मकानों पर गोलीबारी के निशान मिलने की भी बात कही गई है।
अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार रात संदिग्ध हथियारबंद लोगों और CRPF के बीच करीब छह घंटे तक रुक-रुककर गोलीबारी हुई। इस दौरान दो लकड़ी के घरों के जलने की जानकारी सामने आई।
घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
दो कुकी महिलाओं की हत्या, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
तामेंगलोंग के लीसांगफाई गांव में मंगलवार को दो कुकी महिलाओं की गोली मारकर हत्या किए जाने की जानकारी सामने आई। एक कुकी विधायक ने इस घटना में NSCN-IM और ZUF-K से जुड़े कैडरों की कथित भूमिका का आरोप लगाया है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए घटना के पीछे किसकी भूमिका थी, इसे लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
कुकी संगठनों ने दावा किया है कि पिछले चार दिनों में चार महिलाओं समेत छह कुकी लोगों की हत्या हुई है। स्थानीय संगठनों ने फरवरी से अब तक करीब 40 लोगों की मौत का भी दावा किया है।
2023 से जारी है मणिपुर का जातीय संघर्ष
मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच 3 मई 2023 से हिंसा का सिलसिला जारी है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौत और हजारों लोगों के विस्थापित होने की रिपोर्ट सामने आई है।
फरवरी 2026 में उखरुल के लिटन गांव से कुकी-नगा तनाव बढ़ने के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में हिंसा, गोलीबारी और आगजनी की घटनाओं की खबरें सामने आती रही हैं।
मौजूदा तनाव ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है। स्कूल और बाजार बंद होने के साथ परिवहन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने से स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ने की बात कही जा रही है।
फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था, प्रभावित इलाकों में आवाजाही और जरूरी सामान की उपलब्धता सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। वहीं, हत्या और हिंसा से जुड़े विभिन्न आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा जांच के आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
