भारत-EU ट्रेड डील में ट्रंप की भूमिका? अमेरिकी अधिकारी का बड़ा बयान

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India-EU Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ के बीच मंगलवार को मदर ऑफ ऑल डील्स फाइनल हो गई। इस व्यापार समझौते को कई मायनों में ऐतिहासिक बताया जा रहा है। हालांकि भारत EU की इस ट्रेड डील के बाद अमेरिका खिसियानी बिल्ली की तरह खंभा नोच रहा है। अमेरिका के एक शीर्ष अधिकारी ने बुधवार को कहा है कि यह सौदा भारत के पक्ष में झुका हुआ प्रतीत होता है। आगे ट्रंप के अधिकारी ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस तरह अन्य देशों पर टैरिफ लगाकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है, यही कारण है कि यूरोपीय संघ भारत की ओर रुख कर रहा है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने फॉक्स बिजनेस के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि इस समझौते से भारत खूब मजे करेगा। ग्रीर ने कहा, “मैंने अब तक इस डील के कुछ डिटेल्स देखे हैं। सच कहूं तो इसमें भारत को बहुत फायदा होगा। उन्हें यूरोप में ज्यादा मार्केट एक्सेस मिलेगा।” वहीं समझौते पर आगे बातचीत के दौरान अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “ऐसा लगता है कि भारत को प्रवासियों से जुड़े ज्यादा इमिग्रेशन अधिकार मिलेंगे। मुझे लगता है कि कुल मिलाकर, भारत को इससे बहुत फायदा होने वाला है।”

‘ट्रंप ने दिखाया बाहर का रास्ता, इसीलिए हुई भारत-EU ट्रेड डील’

अमेरिकी व्यापार प्रमुख ने भारत EU ट्रेड डील को कम आंकने की कोशिश भी की। उन्होंने कहा जी कि यह कहते हुए कि बदलते वैश्विक माहौल ने यूरोपीय संघ को वैकल्पिक बाजारों की तलाश करने के लिए मजबूर किया है क्योंकि अमेरिका घरेलू प्रोडक्शन को प्राथमिकता दे रहा है और। ग्रीर ने कहा, “रणनीतिक रूप से, यह समझना जरूरी है क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दी है और अन्य देशों से हमारे बाजार तक पहुंचने के लिए मोटा टैरिफ लेना शुरू कर दिया है। इसीलिए ये देश अपने उत्पादों के लिए अन्य रास्ते खोजने की कोशिश कर रहे हैं। और इसलिए EU भी इसी खोज में भारत की ओर रुख कर रहा है।”

अमेरिका को लग रही है मिर्ची

बता दें कि इस ट्रेड डील से अमेरिका को मिर्ची लगी है। इससे पहले अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी एक बयान में कहा है कि डील से यूरोप भारत से रिफाइन किया हुआ रूसी तेल खरीदकर खुद के खिलाफ युद्ध को वित्तपोषित कर रहा है। बेसेंट ने रविवार को एबीसी न्यूज से कहा, ‘‘हमने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया है। अनुमान लगाइए पिछले सप्ताह क्या हुआ? यूरोपीय देशों ने भारत के साथ एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया।’’ उन्होंने कहा, “और एक बार फिर स्पष्ट कर दूं, रूस से तेल भारत में जाता है, रिफाइन उत्पाद बाहर जाता है और यूरोपीय देश रिफाइन किया हुआ उत्पाद खरीदते हैं। वे खुद अपने ही खिलाफ युद्ध को वित्तपोषित कर रहे हैं।”

ऐतिहासिक समझौता

इससे पहले भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसे अबतक का सबसे बड़ा समझौता बताया जा रहा है। नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के अपने दृष्टिकोण के अनुरूप, भारत और 27 देशों के समूह ने अगले पांच वर्षों के लिए एक संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडा पेश किया। इस दौरान मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए वार्ता के समापन सहित कुल 13 समझौतों को अंतिम रूप दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था ‘भारी उथल-पुथल’ का सामना कर रही है और ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ के बीच साझेदारी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में स्थिरता को मजबूत करेगी।

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