सहारनपुर। सहारनपुर का राठी परिवार इन दिनों सुर्खियों में है। इसका कारण बहुत दुखद है, जहां घर का मुखिया 40 वर्षीय अशोक राठी, उनकी 37 साल की पत्नी अंजिता राठी, 70 साल की मां विद्यावती, उनके 16 साल के बड़े बेटे कार्तिक और उनके 13 साल के छोटे बेटे देव, सभी मृत पाए गए। इस परिवार के मुखिया ने न सिर्फ़ 40 सेकंड में अपने परिवार के 4 सदस्यों का मर्डर किया, बल्कि उन सभी को मारने के बाद खुद भी आत्महत्या कर ली।
यह घटना सच में बेहद दुखद और चौंकाने वाली है। एक परिवार के एक साथ इस तरह से खत्म हो जाना, सिर्फ कुछ ही सेकंड में, सोचने पर मजबूर करता है कि एक इंसान का मानसिक और भावनात्मक तनाव कितनी गहरी स्थिति में पहुंच सकता है, जब वह अपने पूरे परिवार को नुकसान पहुंचाने के बारे में सोचता है।
यह घटना सच में दिल दहला देने वाली है। अशोक राठी और उनके परिवार के साथ हुई यह दुखद घटना न सिर्फ सहारनपुर बल्कि पूरे देश में सुर्खियों में रही।
घर के अंदर सभी को बहुत करीब से सिर में गोली मारी गई थी। जब सहारनपुर पुलिस को खबर मिली, तो वे तत्काल क्राइम सीन पर पहुंची, तो उन्हें बेड और दीवारों पर खून के छींटे, गोलियां, गोली के खाली खोखे और फर्श पर तीन देसी पिस्तौलें बिखरी हुई मिलीं। लेकिन सवाल यह था कि इस परिवार के साथ ऐसा क्या हुआ कि एक ही झटके में उनका पूरा परिवार खत्म हो गया? इस कहानी को समझने के लिए आपको सबसे पहले 19 और 20 जनवरी की रात में जाना होगा।
सहारनपुर की कौशिक विहार कॉलोनी में रहने वाले अशोक राठी की दो बहनें हैं। दोनों बहनें भी सहारनपुर में ही रहती हैं। अशोक ने अपनी एक बहन को सुबह 3:12 बजे अपने मोबाइल फोन से एक ऑडियो मैसेज भेजा, जो 1 मिनट और 18 सेकंड लंबा था। उसमें उसने कहा- ‘बहन, मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी है। मैंने अपनी मां, तुम्हारी भाभी और दोनों बच्चों को गोली मारकर मार दिया है। अब मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं। मेरा अंतिम संस्कार खारी बांस गांव में करवाना, और तुम दोनों बहनें मेरी प्रॉपर्टी का हिस्सा आपस में बांट लेना।’
अब, इतनी रात को ऑडियो मैसेज पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। सुबह जब बहन उठी तो उसने अपना मोबाइल फोन का डेटा ऑन किया, तब भाई अशोक के एक के बाद एक तीन मैसेज मिले। पहले मैसेज ऊपर लिखा संदेश था, जबकि बाकी दो में उसके अकाउंट की डिटेल्स, प्रॉपर्टी की जानकारी और दूसरी ज़रूरी डिटेल्स थीं।
पूरे परिवार की हत्या और भाई की आत्महत्या का मैसेज मिलने पर बहन घबरा गई। उसने अशोक और परिवार के दूसरे सदस्यों को फोन करना शुरू किया, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। फिर उसने अपनी दूसरी बहन को, जो उसी कौशिक कॉलोनी में रहती थी, अशोक के ऑडियो मैसेज के बारे में बताया। इसके बाद, अशोक की बहनें और दूसरे रिश्तेदार अशोक के घर पहुंचे। दरवाज़ा बार-बार खटखटाने पर भी कोई जवाब नहीं मिला, तो रिश्तेदारों ने किसी तरह सीढ़ी लगाकर पहली मंज़िल पर चढ़कर किचन की खिड़की तोड़कर अंदर प्रवेश किया। लेकिन अंदर जो नज़ारा उन्होंने देखा, वह भयानक था।
घर के एक कमरे में अशोक, उसकी पत्नी, मैं और उनके दो बेटों का शव मिले। उन सभी के सिर पर गोली के निशान थे, और घावों के आसपास कालापन इस बात का संकेत था कि उन सभी को बहुत करीब से गोली मारी गई थी। क्राइम सीन की पूरी जांच और घटनाओं के क्रम के एनालिसिस के बाद, पुलिस ने शुरुआती तौर पर यह नतीजा निकाला है कि घर के मुखिया अशोक राठी ने अपने पूरे परिवार को सोते समय गोली मार दी और फिर खुद को भी मार डाला।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, राठी ने कथित तौर पर घर के RO वॉटर प्यूरीफायर के पानी में नींद की गोलियां मिला दी थीं। परिवार के सदस्यों ने नींद की गोलियों वाला पानी पिया और गहरी नींद में सो गए, लेकिन अशोक जागा रहा। फिर उसने स्थिति का फायदा उठाया, एक-एक करके परिवार के चार सदस्यों को गोली मारकर मार डाला और फिर आत्महत्या कर ली।
पुलिस को क्राइम सीन पर कुछ नींद की गोलियां और उनके रैपर मिले, जो ज़हर वाले पानी की थ्योरी का समर्थन करते हैं। फिलहाल, सबके मन में यह सवाल है कि अशोक राठी ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया। राठी परिवार में किसी चीज़ की कमी नहीं थी। अशोक खुद सिंचाई विभाग में सर्वेयर के तौर पर काम करता था, और उसके दोनों बच्चे स्कूल जाते थे। उसने पास में ही एक नया घर भी बनवाया था, जहां पूरा परिवार शिफ्ट होने की योजना बना रहा था। इसके बावजूद, उसने यह भयानक काम किया।

यहां बता दें कि, इस बीच, पुलिस को यह भी पता चला है कि अशोक ने पहले भी दो बार अपने परिवार को मारने की कोशिश की थी, लेकिन दोनों बार सब बच गए। उसकी पहली कोशिश COVID-19 महामारी के दौरान हुई थी, और दूसरी लगभग 5 महीने पहले हुई थी।
अशोक को सिंचाई विभाग में नौकरी अपने पिता की जगह पर अनुकंपा के आधार पर मिली थी। उसके पिता भी सर्वेयर थे, लेकिन रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई, जिसके बाद अशोक को सरकारी नौकरी मिल गई। यह अशोक के डिप्रेशन का नतीजा था या कुछ और, उसके कुछ जान-पहचान वालों ने पुलिस को बताया कि वह अक्सर जागते हुए एक परछाई देखने की बात करता था।
वह उसे मौत की परछाई कहता था और उसने इस बारे में अपने परिवार को भी बताया था। इसी डर के कारण पूरा परिवार एक ही कमरे में सोता था। 19 जनवरी की रात को भी पूरा परिवार एक ही कमरे में सोया था, लेकिन सुबह तक अशोक ने उन सभी को मार डाला और फिर खुद भी आत्महत्या कर ली।
