सोना-चांदी में भारी गिरावट, क्या आगे भी जारी रहेगी गिरावट?

मुख्य समाचार राष्ट्रीय व्यापार जगत

सर्राफा बाजार में सोमवार (23 मार्च) को बड़ी गिरावट देखने को मिली, जहां सोना और चांदी दोनों अपने ऑल टाइम हाई से काफी नीचे आ गए हैं। IBJA के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 24 कैरेट सोना करीब ₹1,35,141 प्रति 10 ग्राम पर खुला, जो पिछले बंद भाव से लगभग ₹12,000 से ज्यादा सस्ता है। वहीं, चांदी भी भारी गिरावट के साथ ₹2,01,500 प्रति किलो के स्तर पर आ गई। इस गिरावट के बाद सर्राफा बाजारों में सोना अपने ऑल टाइम हाई ₹1,76,121 से करीब ₹40,980 सस्ता हो चुका है, जबकि चांदी अपने उच्चतम स्तर ₹3,85,933 से ₹1,84,433 तक टूट चुकी है।

50 दिनों में बड़ी गिरावट, निवेशक हैरान

अगर वायदा बाजार की बात करें तो MCX पर सिर्फ 50-55 दिनों में ही कीमती धातुओं में भारी गिरावट आई है। सोना लगभग 25% तक गिर चुका है। चांदी में तो करीब 50% की गिरावट दर्ज हुई है। चांदी, जिसने पहले एमसीएक्स 4,20,000 रुपये का ऑल टाइम हाई छुआ था, अब यहां करीब 2,06,000 रुपये के आसपास कारोबार कर रही है।

क्यों टूट रहे हैं सोना-चांदी?

केडिया कमोडिटीज के प्रेसीडेंट अजय केडिया के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है वैश्विक बाजार में “Risk-off sentiment”, जहां निवेशक तेजी से अपनी पोजिशन काट रहे हैं। इक्विटी बाजार में गिरावट है। निवेशक क्रिप्टो और रियल एस्टेट में बिकवाली कर रहे है। ETF से पैसा का निकलना जारी है। इन सभी ने मिलकर सोना-चांदी पर दबाव बढ़ाया है।

डॉलर मजबूत, फेड सख्त: सोने पर डबल मार

केडिया के मुताबकि फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने भी सोने की चमक फीकी कर दी है। फेड ने साफ संकेत दिया है कि 2026 में सीमित दर कटौती होगी या जरूरत पड़ी तो दरें बढ़ भी सकती हैं। इससे डॉलर मजबूत हुआ है, और जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना-चांदी जैसे “बिना ब्याज वाले निवेश” कम आकर्षक हो जाते हैं।

युद्ध का उल्टा असर: सेफ हेवन भी नहीं बचा

ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के बावजूद इस बार सोने ने पारंपरिक “सेफ हेवन” जैसा प्रदर्शन नहीं किया। इसके पीछे वजह है कि तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ी है, जिससे ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना बढ़ गई है।

आगे क्या? और गिरेंगे या आएगा उछाल?

अजय केडिया के मुताबिक, गिरावट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सोना आगे चलकर ₹1,15,000 तक जा सकता है। जबकि, चांदी ₹1,75,000 प्रति किलो तक फिसल सकती है। हालांकि, इतिहास बताता है कि युद्ध के शुरुआती दौर में गिरावट के बाद सोना-चांदी अक्सर रिकवर करते हैं। इसलिए साल की दूसरी छमाही में इनकी कीमतों में फिर से मजबूती आ सकती है।

निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?

इस समय बाजार में घबराहट है, लेकिन समझदारी यही है कि एकदम बड़ी खरीदारी से बचें। गिरावट में धीरे-धीरे निवेश करें और लंबी अवधि का नजरिया रखें।

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