मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO का इंतजार कर रहे हैं तो ये खबर आपको निराश कर सकती है। दरअसल, सरकारी नियमों में हो रही देरी का असर आईपीओ की समयसीमा पर पड़ता दिख रहा है। भारत सरकार द्वारा लिस्टिंग नियमों में बदलाव किया गया है। इसे औपचारिक रूप देने में देरी हो रही है। यही कारण है कि जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ लॉन्चिंग में भी देरी हो रही है। बता दें कि यह कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल इकाई है और इसे देश के अब तक के सबसे बड़े आईपीओ में से एक माना जा रहा है।
सरकार की अधिसूचना का इंतजार
ब्लूमबर्ग की एक खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि रिलायंस अभी सरकार की आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार कर रही है ताकि वह निवेश बैंकरों की नियुक्ति कर सके और आईपीओ के लिए ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस दाखिल कर सके। जानकारी के लिए बता दें कि निवेश बैंकरों ने जियो प्लेटफॉर्म्स का संभावित मूल्यांकन लगभग 170 अरब डॉलर तक आंका है।
मंजूरी मिलते ही आईपीओ लॉन्च
कंपनी की योजना है कि यदि सरकार की मंजूरी समय पर मिल जाती है तो वह अप्रैल से पहले ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस दाखिल कर सकती है। मुकेश अंबानी ने अगस्त में कहा था कि कंपनी 2026 की पहली छमाही में जियो को सूचीबद्ध करने का लक्ष्य रखती है। उन्होंने पहली बार 2019 में संकेत के रूप में दी थी। जियो प्लेटफॉर्म्स की बात करें तो भारत की सबसे बड़ी वायरलेस टेलीकॉम सेवा देने वाली कंपनी की मालिक है। लगभग 20 वर्षों में रिलायंस समूह की किसी बड़ी इकाई का यह पहला आईपीओ होगा।
क्या हैं नए नियम
दरअसल, सेबी ने सितंबर में अपने नियमों में संशोधन को मंजूरी दी थी। इसके तहत जिन कंपनियों का पोस्ट-इश्यू मार्केट कैप 5 ट्रिलियन रुपये से अधिक होगा, उन्हें आईपीओ में न्यूनतम 5% की जगह सिर्फ 2.5% हिस्सेदारी बेचने की अनुमति दी जा सकती है। यह बदलाव जियो, NSE जैसे बड़े आईपीओ के लिए अहम माना जा रहा है।
हालांकि, इस संशोधन को लागू करने के लिए अभी वित्त मंत्रालय को इसे आधिकारिक गजट में प्रकाशित करना होगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 की पहली छमाही में इसकी अधिसूचना जारी हो सकती है।
एनएसई आईपीओ का अपडेट
हाल ही में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निदेशक मंडल ने अपने बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को मंजूरी दी है। यह इश्यू पूरी तरह से बिक्री पेशकश (ओएफएस) पर आधारित होगा और इसमें नया इश्यू शामिल नहीं होगा। यह निर्णय बाजार नियामक सेबी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिलने के कुछ ही समय बाद आया है। इसके साथ ही एक दशक से अधिक की देरी के बाद एक्सचेंज के लिए अपनी सूचीबद्धता योजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
निदेशक मंडल की बैठक में आईपीओ प्रक्रिया को पूरा करने के लिए गठित समिति के पुनर्गठन को भी मंजूरी दी गई। पुनर्गठित समिति की अध्यक्षता गैर-स्वतंत्र निदेशक तबलेश पांडेय करेंगे। इसमें सार्वजनिक हित निदेशक श्रीनिवास इंजेती, ममता बिस्वाल, अभिलाषा कुमारी और जी शिवकुमार के साथ प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी आशीष कुमार चौहान भी शामिल होंगे।
