जेरुसलम/वॉशिंगटन, तेहरान ने मंगलवार को दुबई के पास पूरी तरह से भरे तेल टैंकर शिप पर हमला किया और उसे जला दिया। दुबई के अधिकारियों ने कहाकि ड्रोन हमले के बाद कुवैत का झंडा लगे अल-सल्मी जहाज पर लगी आग को कंट्रोल कर लिया गया है। अच्छी बात यह है कि तेल का कोई रिसाव नहीं हुआ और चालक दल को कोई चोट नहीं आई। जहाज के मालिक कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने कहाकि हमले में जहाज क्षतिग्रस्त हो गई थी। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट में यह सबसे ताजा घटना है।
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने क्या कहा
एलएसईजी आंकड़ों के मुताबिक जहाज चीन के किंगदाओ की ओर बढ़ रहा था। निगरानी सेवा टैंकर ट्रैकर्स डॉट कॉम के मुताबिक इसमें 1.2 मिलियन बैरल सऊदी कच्चा तेल और 800,000 बैरल कुवैती कच्चा तेल था। अल-सल्मी संभवत: टारगेट नहीं था। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहाकि उन्होंने खाड़ी में एक कंटेनर जहाज को टारगेट किया था, क्योंकि उसका संबंध इजरायल से था। लेकिन ऐसा मालूम होता है कि ईरान सिंगापुर का झंडा लगे, हेफोंग एक्सप्रेस का जिक्र कर रहे थे। शिपिंग डेटा के मुताबिक यह अल-सल्मी के पास लंगर डाले हुए था।
क्या कर रहा है अमेरिका
उधर ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी जमीनी अभियान की अटकलों के बीच, उभयचर आक्रमण पोत यूएसएस ट्रिपोली को हिंद महासागर में तैनात किया गया है। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने सोशल मीडिया पोस्ट में यह जानकारी दी। सेंटकॉम द्वारा जारी एक तस्वीर में 45,000 टन वजनी युद्धपोत को रविवार को हिंद महासागर में नौवहन करते हुए दिखाया गया, हालांकि ईरान से इसकी सटीक दूरी का खुलासा नहीं किया गया। अमेरिका के रक्षा विभाग द्वारा 26 मार्च को साझा की गई तस्वीरों के अनुसार, ट्रिपोली पर 31वें समुद्री अभियान दल के लगभग 1,800 नौसैनिक तैनात हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिकी बल ईरान के खार्ग द्वीप को निशाना बना सकते हैं, जो देश के लगभग 90 प्रतिशत तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र है। इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी सैनिक के उतरने की कोशिश पर उसे नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा और वैश्विक ऊर्जा ढांचे पर हमले तेज किए जाएंगे।
इसी बीच, सैन्य जमावड़े के तहत लगभग 2,200 नौसैनिकों के साथ 11वां नौसैनिक अभियान दल को भी पश्चिम एशिया की ओर भेजे जाने की खबर है। इसके अलावा 82वीं वायुसेना इकाई के करीब 1,000 सैनिकों को क्षेत्र में तैनात किए जाने की सूचना है, जो बढ़ते तनाव के बीच व्यापक अमेरिकी सैन्य तैयारी का संकेत देता है।
