पितरों का तर्पण करने का सही तरीका: पिठोरी अमावस्या की विशेष जानकारी

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भाद्रपद मास की अमावस्या को पिठोरी और कुशग्रहणी अमावस्या भी कहते हैं। यह पितरों के तर्पण और दान के लिए बहुत शुभ मानी जाती है। ऐसा कहा जाता है कि इस अमावस्या को पितरों का तर्पण करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। वैसे तो श्राद्ध में पितरों के लिए भोजन कराने का नियम है, लेकिन अगर अमावस्या के दिन भी अगर हम पितरों का श्राद्ध और तर्पण करते हैं, तो पितृ प्रसन्न होते हैं। पितर हर अमावस्या पर श्राद्धा की आशा से प्रतीक्षा करते रहते हैं। जो अमावास्या तिथि को जल से भी श्राद्ध करता है, उसके पितर तृप्त होते हैं। इस साल भाद्रपद मास की अमावस्या 22 और 23 अगस्त दो दिन मनाई जा रही है। स्नान दान की अमावस्या 23 अगस्त को और मनाई जाएगी, लेकिन जो लोग तर्पण करते हैं, उनके लिए अमावस्या तिथि 22 अगस्त को रहेगी, क्योंकि इस दिन 12 बजे आप तर्पण कर सकते हैं। 23 की सुबह अमावस्या तिथि 11 बजे तक रहेगी। इसलिए दोनों दिन अमावस्या मनाई जा सकती है। इस साल यह अमावस्या शनिवार को है, तो इसे शनिश्चरी अमावस्या कहते हैं।

इस दिन पितरों के लिए क्या करना चाहिए

इस दिन पितरों के लिए तर्पण करना बहुत अच्छा माना जाता है, ऐसा कहा जाता है कि इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और आपको आशीर्वाद देकर जाते हैं। दोपहर के समय ही पितरों को अग्यारी देने के लिए एक गाय का उपला लें,इसे जला लें और इस पर गुड़-घी अर्पित करें। इसके साथ खीर और पूरी अर्पित करें। इसके बाद पितरों का तर्पण करें, इसके लिए एक लौटे में जल लें, जल में काले तिल और जौ रखें। अपने पूर्वजों के नाम को याद करते हुए अंगूठे से पितरों को जल अर्पित करें। मंत्र ऊँ पितृदेवेभ्यो नम: का उच्चारण करें। इसके बाद पितरों के लिए कपड़े, अनाज और तिलदान करें। गरीबों को भोजन कराने से भी पितृ प्रसन्न होते हैं।

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