Shiv Puja Niyam: शिवलिंग पर पारिजात चढ़ाने से प्रसन्न होते हैं भोलेनाथ, लेकिन भूलकर भी न करें ये गलती

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पारिजात यानी हरसिंगार का फूल अपनी खुशबू के साथ धार्मिक महत्व के लिए भी जाना जाता है। हिंदू मान्यताओं में इसे दिव्य पुष्प माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, पारिजात का संबंध समुद्र मंथन से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि यह फूल देवताओं को बेहद प्रिय है और पूजा-पाठ में इसे अर्पित करने से विशेष पुण्य मिलता है। भगवान शिव की पूजा में भी पारिजात के फूल चढ़ाने का विशेष विधान है। हालांकि, इसे शिवलिंग पर अर्पित करते समय एक खास बात का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।

पारिजात का धार्मिक महत्व

पारिजात के फूल को हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। धार्मिक कथाओं में इसे स्वर्ग से धरती पर आए दिव्य वृक्ष के रूप में बताया गया है। हरिवंश पुराण से जुड़ी मान्यताओं में भी पारिजात को मनोकामना पूरी करने वाला वृक्ष कहा गया है। इसकी खासियत यह भी है कि फूल रात के समय खिलते हैं और सुबह होते-होते पेड़ से नीचे गिर जाते हैं। इसी वजह से पारिजात को दूसरे फूलों से अलग माना जाता है। भगवान शिव को पारिजात अर्पित करने की परंपरा भी इसी धार्मिक विश्वास से जुड़ी हुई है।

फूल तोड़कर ना चढ़ाएं

शिवलिंग पर पारिजात का फूल चढ़ाते समय सबसे खास नियम इसे तोड़ने से जुड़ा बताया गया है। मान्यता है कि पारिजात के फूल को पेड़ से तोड़कर भगवान शिव को अर्पित नहीं करना चाहिए। इस पुष्प की विशेषता यही मानी जाती है कि यह रात में खिलने के बाद सुबह अपने आप जमीन पर गिर जाता है। इसलिए पूजा के लिए पेड़ से फूल तोड़ने के बजाय जमीन पर गिरे हुए ताजे फूलों को ही उठाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस तरह फूल चढ़ाने से पूजा का भाव पूरा होता है। इसे पारिजात की पूजा-विधि से जुड़ा सबसे जरूरी नियम माना जाता है।

फूल धोने की जरूरत नहीं

पेड़ से स्वाभाविक रूप से गिरे पारिजात के फूल को धोने की जरूरत नहीं होती है। जमीन से फूल उठाते समय यह जरूर देखना चाहिए कि वह साफ और पूजा योग्य हो। इसके बाद उसे सीधे भगवान शिव को अर्पित किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता में पारिजात को अत्यंत पवित्र फूल माना गया है। इसलिए इसे तोड़ना या अनावश्यक रूप से धोना उचित नहीं माना जाता है। श्रद्धा के साथ साफ फूल शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।

शिव पूजा में क्यों खास है परिजात?

भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और कई तरह के पुष्प अर्पित करने की परंपरा है। इन्हीं में पारिजात के फूल को भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि महादेव को पारिजात अर्पित करने से भक्त की मनोकामना पूरी होती है और पूजा का फल प्राप्त होता है।

पारिजात का संबंध भगवान कृष्ण से जुड़ी पौराणिक कथा में भी मिलता है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण पारिजात वृक्ष को धरती पर लेकर आए थे। इसी कारण इसे भगवान विष्णु और कृष्ण से जुड़ी पूजा परंपराओं में भी विशेष माना जाता है। इस तरह पारिजात का धार्मिक महत्व केवल शिव पूजा तक सीमित नहीं है।

घर में लगाना भी शुभ माना

पारिजात को धार्मिक महत्व के साथ घर के वातावरण के लिए भी शुभ माना जाता है। रात में खिलने वाले इसके सफेद फूल और सुबह बिखरी नारंगी डंडी वाले पुष्प वातावरण को सुगंधित कर देते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, घर में पारिजात का पौधा होना शुभता और सकारात्मक भाव से जुड़ा माना जाता है। इसके अलावा पारिजात का पौधा पारंपरिक रूप से औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है और इसके अलग-अलग हिस्सों का उपयोग लोक चिकित्सा में किया जाता रहा है। हालांकि, किसी स्वास्थ्य समस्या में इसका इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।

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