जबलपुर। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल के कार्यकाल और नए राज्यपाल की नियुक्ति में देरी को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि नए राज्यपाल के पदभार संभालने तक मौजूदा राज्यपाल पद पर बने रह सकते हैं।
मंगुभाई पटेल ने 8 जुलाई 2021 को मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था और उनका पांच वर्ष का सामान्य कार्यकाल जुलाई 2026 में पूरा हो गया था। इसके बाद नए राज्यपाल की नियुक्ति में देरी को लेकर यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा था।
डॉ. एमए खान ने दायर की थी याचिका
यह जनहित याचिका जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. एमए खान की ओर से दायर की गई थी।
याचिका में मांग की गई थी कि मंगुभाई पटेल का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद नए राज्यपाल की नियुक्ति होने तक मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को राज्यपाल का प्रभार सौंपा जाए।
मामले की सुनवाई 15 सितंबर को पूरी हुई थी और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 17 सितंबर को डिवीजन बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए जनहित याचिका खारिज कर दी।
अनुच्छेद 156 को लेकर हाईकोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 156(3) के प्रावधान का आधार लेते हुए कहा कि राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष होता है, लेकिन कार्यकाल पूरा होने मात्र से पद तत्काल रिक्त नहीं हो जाता।
संवैधानिक व्यवस्था के मुताबिक, राज्यपाल अपने उत्तराधिकारी के पदभार संभालने तक पद पर बने रह सकते हैं। अदालत ने इसी प्रावधान को राज्यपाल के पद की निरंतरता से जोड़कर देखा।
इसका मतलब यह है कि नए राज्यपाल की नियुक्ति और उनके पदभार ग्रहण करने के बीच राज्यपाल का संवैधानिक पद खाली नहीं माना जाएगा।
मामले में प्रमुख बातें
- मंगुभाई पटेल ने 8 जुलाई 2021 को राज्यपाल पद संभाला था।
- उनका पांच वर्ष का सामान्य कार्यकाल जुलाई 2026 में पूरा हुआ।
- नए राज्यपाल की नियुक्ति में देरी को लेकर जनहित याचिका दाखिल हुई।
- याचिका में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को प्रभार देने की मांग की गई थी।
- हाईकोर्ट ने 17 सितंबर को याचिका खारिज कर दी।
- अदालत ने अनुच्छेद 156(3) के तहत उत्तराधिकारी के पदभार संभालने तक मौजूदा राज्यपाल के बने रहने की व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना।
पहले सुरक्षित रखा गया था फैसला
इस मामले की सुनवाई 15 सितंबर को जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ के सामने हुई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से भी संविधान के अनुच्छेद 156 का हवाला दिया गया था। केंद्र की ओर से यह दलील रखी गई थी कि नए राज्यपाल की नियुक्ति होने तक मौजूदा राज्यपाल पद पर बने रह सकते हैं।
अब क्या है संवैधानिक स्थिति?
हाईकोर्ट के फैसले के बाद फिलहाल मंगुभाई पटेल के पद पर बने रहने को लेकर दायर इस याचिका का निपटारा हो गया है। अदालत के मुताबिक, केवल पांच साल का सामान्य कार्यकाल पूरा हो जाना अपने आप में राज्यपाल के पद को रिक्त नहीं करता।
नए राज्यपाल की नियुक्ति और उनके पदभार ग्रहण करने तक मौजूदा राज्यपाल के पद पर बने रहने की संवैधानिक व्यवस्था लागू रहती है।
इस फैसले से मध्य प्रदेश में राज्यपाल के कार्यकाल को लेकर उठे संवैधानिक सवाल पर हाईकोर्ट की स्थिति स्पष्ट हो गई है। याचिका में मुख्य न्यायाधीश को अंतरिम प्रभार देने की मांग को अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
