उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनवाड़ी केंद्रों और बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब देश की नई पीढ़ी को बचपन से ही बेहतर पोषण, शिक्षा और संस्कार मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने गांवों और स्थानीय स्तर पर बच्चों के विकास को देश के भविष्य की बुनियाद बताया।
वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में 9 सितंबर को 9वें राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बच्चों के विकास की शुरुआत उनके शुरुआती वर्षों से होती है। यही वजह है कि आंगनवाड़ी केंद्रों और बेसिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
70 हजार से ज्यादा आंगनवाड़ी केंद्रों का हुआ नवीनीकरण
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में पिछले वर्षों के दौरान किए गए कामों का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश के कई आंगनवाड़ी केंद्र बदहाल स्थिति में थे।
उनके अनुसार, पिछले साढ़े नौ वर्षों में 70,000 से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों का नवीनीकरण किया गया है। इन केंद्रों को बच्चों के लिए बेहतर और सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया गया है।
सरकार की ओर से आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए बजट आवंटन में भी प्राथमिकता देने की बात मुख्यमंत्री ने कही।
इन सुविधाओं पर दिया गया जोर
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले कई केंद्रों पर बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी थी। इनमें शामिल थे:
- पीने के पानी की सुविधा
- शौचालय की व्यवस्था
- गर्म पका हुआ भोजन
- बच्चों के अनुकूल शिक्षण वातावरण
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को समय पर मानदेय
सरकार का लक्ष्य इन कमियों को दूर करके आंगनवाड़ी व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी बनाना है।
‘बाल वाटिका’ से खेल-खेल में पढ़ाई
मुख्यमंत्री ने बाल वाटिका पहल का भी उल्लेख किया। इसके जरिए छोटे बच्चों को स्कूल जाने से पहले ही सीखने का माहौल देने की कोशिश की जा रही है।
बाल वाटिका में बच्चों को खेल और गतिविधियों के माध्यम से अक्षर तथा अंक पहचानने जैसी शुरुआती शिक्षा देने पर जोर है। इससे बच्चों के लिए औपचारिक स्कूल शिक्षा की शुरुआत आसान बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, बचपन में मिलने वाली शिक्षा और पोषण का सीधा असर बच्चे के आगे के जीवन पर पड़ता है।
‘मेरी आंगनवाड़ी, मेरी ज़िम्मेदारी!’ पर जोर
इस वर्ष के राष्ट्रीय पोषण माह की थीम “मेरी आंगनवाड़ी, मेरी ज़िम्मेदारी!” है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों को बेहतर बनाना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है।
उन्होंने इसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायतों और आम नागरिकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
यानी सरकार चाहती है कि स्थानीय समुदाय भी बच्चों के पोषण, शिक्षा और विकास से जुड़े प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाए।
स्वस्थ बच्चा ही बनेगा मजबूत युवा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी देश की असली ताकत उसके युवा होते हैं। लेकिन मजबूत और सक्षम युवा तैयार करने की प्रक्रिया बचपन से ही शुरू हो जाती है।
उन्होंने स्वस्थ मां और स्वस्थ बच्चे को बेहतर विद्यार्थी और आगे चलकर सक्षम युवा की बुनियाद बताया।
उनके मुताबिक, शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बच्चे आगे चलकर सकारात्मक सोच के साथ समाज और देश के विकास में योगदान दे सकते हैं।
इसलिए शुरुआती उम्र में पोषण + शिक्षा + स्वास्थ्य पर ध्यान देना केवल सामाजिक कल्याण का विषय नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
2001 के विजन का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने विजन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए जिस मॉडल और सोच के साथ विकास की दिशा में काम शुरू किया था, उसे अब व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गांवों से लेकर शहरों तक बच्चों और युवाओं को मजबूत बनाना विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
आंगनवाड़ी केंद्रों को सिर्फ पोषण तक सीमित रखने की तैयारी नहीं
सरकार की मौजूदा दिशा से यह संकेत मिलता है कि आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका केवल बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखी जा रही है।
इन केंद्रों को शुरुआती शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और बाल विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों को भी बच्चों के लिए मजबूत शैक्षणिक आधार तैयार करने वाली व्यवस्था के रूप में विकसित करने पर जोर है।
इस पूरी सोच का केंद्र गांव और स्थानीय समुदाय हैं, क्योंकि देश की बड़ी आबादी और बड़ी संख्या में बच्चे ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं।
वाराणसी में जुटे कई बड़े चेहरे
राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और बेबी रानी मौर्य भी मौजूद रहीं।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और आंगनवाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर जोर दिया गया।
कुल मिलाकर योगी आदित्यनाथ का संदेश साफ है कि आंगनवाड़ी केंद्रों को मजबूत किए बिना विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार नहीं की जा सकती। बच्चों को बेहतर पोषण और शुरुआती शिक्षा देकर ही ऐसी युवा पीढ़ी तैयार की जा सकती है, जो भविष्य में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाए।
