नयी दिल्ली, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर पेपर लीक मामले में राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार विद्यार्थियों से जुड़े हर मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने और उसके आधार पर ठोस नीति बनाने के लिए तैयार है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पार्टी मुख्यालय में आज रात आयोजित एक विशेष संवाददाता सम्मेलन में कहा कि श्री गांधी ने पिछले 10 साल में पेपर लीक के 152 मामलों का उल्लेख किया है, जो जांच का विषय है और सरकार इसकी जांच कराकर दूध का दूध और पानी का पानी करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि श्री गांधी ने इस मामले में एक पक्षीय बात की जबकि कांग्रेस और उसके गठबंधन वाले दलों के शासन वाले राज्यों में भी तमाम शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की अनेक घटनाएं हुई हैं। इस संदर्भ में उन्होंने जम्मू-कश्मीर,हिमाचल प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पंजाब, केरल और कर्नाटक में गैर भाजपा सरकारों के दौर में पश्च पत्रों के लीक होने के कुछ मामले गिनाये। उन्होंने कहा कि यह सूची लंबी है।
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने सवाल किया, “आप (श्री गांधी) ‘सलेक्टिव’ क्यों हैं। आपने इंडिया गठबंधन सरकारों के बारे में चर्चा क्यों नहीं की। इससे स्पष्ट है कि आपका उदेश्य विद्यार्थियों का हित या शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना नहीं है, आप उनको न्याय नहीं दिलाना चाहते। आप विद्यार्थियों के मुद्दे पर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं।”
श्री नड्डा ने कहा कि यह विषय आरोप-प्रत्यारोप का नहीं होना चाहिए। छात्रों के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। इस पर गहन चर्चा कर समाधान निकाला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चर्चा के लिए सबसे उपयुक्त मंच संसद है। विपक्ष जितनी देर चाहे, सरकार उतनी देर चर्चा कराने को तैयार है। बात विद्यार्थियों के संबंधित समस्या के निदान की होनी चाहिए, ताकि कोई ठोस नीति तय की जा सके। उन्होंने कहा कि बच्चे देश के भविष्य हैं। उनकी जितनी जिम्मेदारी सरकार की है, उतनी ही विपक्ष की भी है। विपक्ष अपनी जिम्मेदीरा निभाये, उसे चर्चा के लिए ‘गोल पोस्ट नहीं बदलना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेता श्री गांधी ने आज ही एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया था कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में पेपर लीक के 152 मामले सामने आए हैं, लेकिन एक भी मामले में किसी को सजा नहीं हुई है। श्री गांधी का यह आरोप भी था कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहे हैं और उनके इस्तीफे की मांग जायज है।
