बलौदाबाजार। अंधविश्वास फैलाकर लोगों को ठगने वाले अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की सिमगा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। भूत-प्रेत का साया और पूजा-पाठ के नाम पर बीएससी की छात्रा से ऑनलाइन ठगी करने वाले मध्य प्रदेश के शातिर आरोपी जयप्रकाश मिश्रा को न्यायालय ने दोषी करार देते हुए कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में विवेचना अधिकारी प्रधान आरक्षक ओंकार सिंह राजपूत द्वारा जुटाए गए वैज्ञानिक और दस्तावेजी साक्ष्य आरोपी को सजा दिलाने में अहम साबित हुए। पूरा मामला सिमगा थाना क्षेत्र का है।
तांत्रिक बनकर छात्रा को डराया, पूजा के नाम पर ठगे पैसे
पुलिस के अनुसार, सिमगा निवासी बीएससी थर्ड सेमेस्टर की छात्रा को आरोपी जयप्रकाश मिश्रा ने मोबाइल फोन पर संपर्क किया था। आरोपी ने खुद को तांत्रिक बताते हुए छात्रा को डराया कि उसके ऊपर भूत-प्रेत का साया है और यदि समय पर पूजा-पाठ नहीं कराया गया तो उसके साथ कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। अंधविश्वास और डर का फायदा उठाकर आरोपी ने छात्रा को अपने झांसे में लिया। इसके बाद अलग-अलग समय पर पूजा कराने के नाम पर अपने क्यूआर कोड के जरिए छात्रा से कुल 18 हजार 600 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए। ठगी का एहसास होने के बाद पीड़िता ने मामले की शिकायत सिमगा थाने में दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 490/2025 दर्ज कर जांच शुरू की।
वैज्ञानिक जांच से आरोपी तक पहुंची पुलिस
मामले की विवेचना प्रधान आरक्षक ओंकार सिंह राजपूत को सौंपी गई। उन्होंने जांच के दौरान तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों को जुटाने पर विशेष ध्यान दिया। विवेचना अधिकारी ने सबसे पहले घटना स्थल का निरीक्षण किया और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। इसके साथ ही घटना स्थल का नजरी नक्शा तैयार किया गया। आरोपी की पहचान और उसके खिलाफ पुख्ता साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस ने बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच की। बैंक ऑफ बड़ौदा सिमगा से पीड़िता के खाते का स्टेटमेंट और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से जुड़े दस्तावेज प्राप्त किए गए। इन डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे मध्य प्रदेश के शहडोल से गिरफ्तार किया गया।
मजबूत चार्जशीट के आधार पर साबित हुआ अपराध
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ न्यायालय में मजबूत अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड और गवाहों के आधार पर आरोपी के खिलाफ अपराध साबित किया। साक्ष्यों की मजबूती के कारण न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया।
न्यायालय ने सुनाई अलग-अलग धाराओं में सजा
मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सिमगा, योगिता जांगड़े की अदालत ने 9 जुलाई को आरोपी जयप्रकाश मिश्रा के खिलाफ फैसला सुनाया। न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत आरोपी को 2 वर्ष के कारावास और 300 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, धारा 319(2) BNS के तहत आरोपी को 1 वर्ष के कारावास और 200 रुपये अर्थदंड की सजा दी गई। अर्थदंड नहीं भरने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अंधविश्वास के नाम पर ठगी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी
पुलिस ने बताया कि अंधविश्वास फैलाकर लोगों को डराने और आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाले अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में आरोपी को सजा दिलाने में सहायक लोक अभियोजन अधिकारी मनीष कुमार केशर और थाना सिमगा के प्रधान आरक्षक ओंकार सिंह राजपूत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिस टीम के प्रयासों की सराहना की है।
आरोपी का विवरण: आरोपी जयप्रकाश मिश्रा पिता श्यामलाल मिश्रा, उम्र 44 वर्ष, निवासी रामानुज कॉलोनी, वार्ड नंबर 17, शहडोल, थाना सोहागपुर, जिला शहडोल (मध्य प्रदेश) का रहने वाला है।
