कांकेर। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सीमा क्षेत्र में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। गढ़चिरौली जिले के घने जंगलों में नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखा गया एक हथियार निर्माण कारखाना सुरक्षाबलों ने ध्वस्त कर दिया। इस संयुक्त कार्रवाई में गढ़चिरौली पुलिस और सीआरपीएफ ने बड़ी मात्रा में हथियार बनाने की सामग्री बरामद कर उसे मौके पर ही नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई 22 जून से 27 जून 2026 के बीच चलाए गए विशेष अभियान के दौरान की गई। अभियान के अंतिम दिन 27 जून को मिली गुप्त सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों ने जंगल क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन तेज किया। इसी दौरान जमीन के नीचे छिपाकर रखा गया नक्सलियों का हथियार निर्माण ठिकाना खोज निकाला गया।
सुरक्षाबलों ने मौके से भारी मात्रा में हथियार बनाने में उपयोग होने वाला सामान बरामद किया। इसमें करीब 5 से 6 टन वजनी लेथ मशीन, 150 क्लैंप, विभिन्न प्रकार के पाइप, 220 बोर पाइप, 20 लोहे की रॉड और हथियार निर्माण में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण शामिल हैं। यह पूरा सामान जंगल के भीतर बेहद सुनियोजित तरीके से छिपाकर रखा गया था, ताकि जरूरत पड़ने पर नक्सली इसका उपयोग हथियार और विस्फोटक तैयार करने में कर सकें। पुलिस के अनुसार, नक्सली लंबे समय से जंगल क्षेत्रों में इस तरह के गुप्त ठिकानों का इस्तेमाल कर रहे थे, जहां वे हथियार निर्माण की तैयारी करते थे। यह ठिकाना छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा के घने और दुर्गम जंगल क्षेत्र में स्थित था, जिससे इसकी पहचान करना बेहद मुश्किल था।
अभियान के दौरान सुरक्षाबलों ने क्षेत्र की घेराबंदी कर पूरे इलाके की तलाशी ली और संदिग्ध सामग्री को एक-एक कर बाहर निकाला। बरामद सामान की जांच के बाद इसे मौके पर ही नष्ट कर दिया गया, ताकि इसका दोबारा इस्तेमाल न किया जा सके। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह कार्रवाई नक्सलियों के लॉजिस्टिक नेटवर्क और हथियार निर्माण क्षमता पर एक बड़ा प्रहार है। इससे नक्सलियों की गतिविधियों को गंभीर नुकसान पहुंचा है और उनके हथियार आपूर्ति तंत्र को बड़ा झटका लगा है। पुलिस ने बताया कि इस तरह के अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे ताकि नक्सली नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई से क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण में मदद मिलने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर भी इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से यह क्षेत्र नक्सल गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है।
