तमिलनाडु में इतिहास रचने वाला राजनीतिक परिवर्तन नजर आ रहा है। विधानसभा चुनाव में एक भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के बाद राज्य दशकों बाद पहली बार गठबंधन सरकार बनाने जा रहा है। अभिनेता से राजनेता बने विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, लेकिन 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों से कम प्राप्त करने के कारण अब गठबंधन की राह अपनाई जा रही है।
मंगलवार यानी आज टीवीके मुख्यालय में विजय द्वारा नवनिर्वाचित विधायकों के साथ की गई बैठकों में गठबंधन की रूपरेखा साफ होने लगी। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस (5 सीटें), वीसीके (2), सीपीआई (2) और सीपीआई(एम) (2) के कुल 11 विधायकों का समर्थन टीवीके को बहुमत दिलाने के लिए पर्याप्त होगा। रिपोर्ट के अनुसार, इन दलों के साथ अनौपचारिक बातचीत चल रही है। बताया जा रहा है कि उन्होंने गठबंधन सरकार बनाने की इच्छा जताई है।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने कहा कि जनता गठबंधन सरकार चाहती है। हम और वामपंथी दल राज्य में धर्मनिरपेक्ष मोर्चे के तहत काम करेंगे। वहीं, टीवीके सूत्रों ने बताया कि विजय ने चुनाव प्रचार के दौरान ही गठबंधन सरकार के विचार का समर्थन किया था।
मंत्रिमंडल बंटवारे का फॉर्मूला
रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित गठबंधन के तहत कांग्रेस को दो मंत्रालय मिलने की संभावना है, जबकि वीसीके और वाम दलों को एक-एक मंत्रालय दिए जा सकते हैं। टीवीके अपने सहयोगियों को कुल 4 से 6 मंत्री पद सौंपने की तैयारी में है, ताकि अनुभव की कमी को पूरा किया जा सके। यहां ये बताना जरूरी है कि टीवीके के अधिकतर विधायक पहली बार चुने गए हैं। ऐसे में विजय को अनुभवी और जानकार लोगों की जरूरत है।
यही कारण है कि सरकार में प्रशासनिक मजबूती के लिए टीवीके पूर्व आईएएस अधिकारी और भ्रष्टाचार विरोधी छवि वाले यू सगायम को विधानसभा में लाने की रणनीति बना रही है। संभावना है कि विजय द्वारा जीती गई तिरुचि पूर्व सीट से उपचुनाव कराकर उन्हें विधायक बनाया जाए।
बताया जा रहा है कि आज ( मंगलवार ) टीवीके विधायकों द्वारा विजय को विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद राज्यपाल उन्हें सरकार बनाने का निमंत्रण देंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, विजय सदन में बहुमत साबित करने के लिए एक सप्ताह का समय मांग सकते हैं और सप्ताह के अंत तक सरकार का कार्यभार संभाल लिया जाएगा। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह गठबंधन तमिलनाडु की राजनीति में नया अध्याय साबित हो सकता है, जहां अब तक सत्ता हमेशा एक पार्टी के हाथ में केंद्रित रही है।
