1 अप्रैल से शुरू होगी 16वीं राष्ट्रीय जनगणना, डिजिटल कुंडली भी तैयार करेगी सरकार का सर्वे
देश में 16वीं राष्ट्रीय जनगणना की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रही है, जो इस बार पहले से कहीं ज्यादा व्यापक और डिजिटल रूप में होगी। यह जनगणना अब सिर्फ जनसंख्या गिनने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आम नागरिकों के जीवनस्तर, सुविधाओं और सामाजिक ढांचे की विस्तृत तस्वीर भी पेश करेगी।
सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइन और FAQ के अनुसार, इस बार पहले चरण (हाउस लिस्टिंग) में नागरिकों से करीब 33–34 सवाल पूछे जाएंगे। इसमें मकान की स्थिति, निर्माण सामग्री, पानी-बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं, परिवार के सदस्यों की संख्या, उपयोग में आने वाले अनाज, इंटरनेट सुविधा और वाहन जैसी जानकारियां शामिल होंगी।
दो चरणों में होगी पूरी प्रक्रिया
जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा, जिसमें घरों और परिसंपत्तियों का विवरण जुटाया जाएगा। इसके बाद दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा, जिसमें वास्तविक जनसंख्या की गणना की जाएगी।
पहली बार मिलेगा सेल्फ-एन्युमरेशन का विकल्प
इस बार सरकार ने नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए ऑनलाइन सेल्फ-एन्युमरेशन (स्व-गणना) की सुविधा दी है। लोग खुद पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी भर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया ज्यादा तेज और पारदर्शी बनेगी।
लिव-इन रिलेशनशिप पर बड़ा बदलाव
इस जनगणना की सबसे चर्चित बात यह है कि लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर नई व्यवस्था लागू की गई है। यदि कोई जोड़ा लंबे समय से साथ रह रहा है और अपने रिश्ते को स्थिर मानता है, तो उसे जनगणना में विवाहित जोड़े के रूप में दर्ज किया जाएगा।
सिर्फ आंकड़े नहीं, नीति निर्माण का आधार
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह जनगणना देश के सामाजिक-आर्थिक ढांचे का एक बड़ा डिजिटल डेटाबेस तैयार करेगी। इससे सरकार को योजनाएं बनाने, संसाधनों के बेहतर वितरण और नीतिगत फैसलों में काफी मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, 2026 की जनगणना आम लोगों के जीवन के हर पहलू को छूने वाली “डिजिटल प्रोफाइलिंग” के रूप में सामने आ रही है, जो आने वाले वर्षों में देश की विकास दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
