रायपुर। ड्रग कंट्रोलर विभाग दवाइयों की गुणवत्ता की जाँच नहीं करता जबकि भारत सरकार के अधिनियम के अनुसार सभी दवाइयों की लॉन्चिंग के समय और मार्केट में प्लेसमेंट होने के दौरान दवाइयों की समय-समय पर गुणवत्ता जाँच होनी चाहिए। लेकिन ड्रग विभाग नक़ली दवा है या कम स्तर की दवा है इसके लिए सबूत माँगता है वो भी पत्रकारों से विभाग का साफ़ कहना है कि विभाग के लिए मुखबिरी करो विभाग की हाथ में हाथ धरे बैठे रहना विभाग का कार्य जो उसकी ड्यूटी में सुचारु रूप से करना है वो भी नहीं करेगा इससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि छत्तीसगढ़ में डग कंट्रोल विभाग नक़ली दवा माफिय़ाओं के गिरफ्त में है।
हमारी जाँच पड़ताल में स्पष्ट रूप से बड़ी-बड़ी कंपनियों की टैबलेट में गुणवत्ता की कमी पाई गई । मानक गुणवत्ता के अनुसार टैबलेट के ह्म्ड्डश्चश्चद्गह्म्, 600रू द्द 50 रूद्द जो भी रूद्द लिखा पाया गया लेकिन टैबलेट की जाँच के उपरांत उसकी गुणवत्ता का प्रतिशत आधे से भी ज़्यादा कम था इसका सीधा मतलब है जो दवाई बाज़ार में बिक्र रही है जिसका मानक औऱ गुणवत्ता से कोई सीधा संबंध नहीं है। जो दवाई मार्केट में एबिलेबल है सबसे घटिया है लेकिन उसे सौ फीसदी असली बताया जा रहा है वो माल नक़ली है इस पर कार्रवाई करने से ड्रग विभाग कतराता है।
ड्रग विभाग के अधिकारी अपनी जि़म्मेदारी से मुक्त होते जा रहे हैं तो सरकारी अधिकारी मोटी तनख्वाह मैं ऑफि़स में बैठकर नक़ली दवा व्यापारियों -माफिय़ाओं से पैसा लेकर जनता को ही नक़ली दवाइयों का ज़हर देकर मरीजों के जीवन को बर्बाद होने केकगार पर लाकर खड़े कर दिए है। ऊपर से पत्रकारों को बोलते मुखबिरी करके बताओ कि नक़ली दवा कहाँ है। जबकि उनकी जि़म्मेदारी बनती है प्रति सप्ताह सभी डिस्ट्रीब्यूटरों के गोदान स्टोर्स में जाकर दवाई की बिलिंग और मानक अनुसार चेक करें और दवाइयों को जाँच कराए । प्रत्येक दिन डिस्ट्रीब्यूटर की दुकान में जाकर ड्रग कंट्रोल विभाग और ड्रग इंस्पेक्टर को ये कार्रवाई करना ही चाहिए । अधिकारियों कर्मचारियों की सर्विस बुक के हिसाब से ड्यूटी और जि़म्मेदारी भी रिमार्क हो। प्रदेश में भ्रष्ट और बेईमान अधिकारियों और ड्रग विभाग के कारण वर्तमान राज्य सरकार ज़बरन बदनाम हो रही है । बदनाम करने की साजि़श रच कौन रहा है ये भी जानना ज़रूरी है। अधिकांश नक़ली दवा के माफिय़ा प्रदेश के बाहर से आए हुए होने के कारण छत्तीसगढ़ की जनता को मनमाना पैसा और नक़ली दवाओं से लूट रहे हैं कुछ कांग्रेस के बड़े नेता नक़ली दवा कारोबारियों और माफिय़ा को छत्तीसगढ़ रायपुर में लाकर बसाने का ठेका ले रखा है।
नक़ली दवाइयों का कारोबार आइए समझते हैं बड़ी सी बड़ी कम्पनियां दवाइयों के रीपर में जिस कैमिकल से दवाइयां बनती है उसका वो केमिकल का नाम लिखती है तथा उसमें उसकी मिलीग्राम रूत्र मात्रा भी लिखी जाती है पूरा खेल असली और नक़ली का यही से शुरू होता है । बड़ी से बड़ी ब्रांड की दवाई रूत्र जो लिखी होती है ज़्यादातर या तो कम होती है या पर्याप्त मात्रा में रूत्र लिखे हुए के अनुसार नहीं होती दवाइयों के इस काले कारोबार में ड्रग विभाग की एंट्री होती है ड्रग कंट्रोल विभाग प्रत्येक ड्रग को जाँचना और उसकी स्टॉक की पोज़ीशन को भी देखना है, ये विभाग का काम है पर्याप्त मात्रा में दवाईयों की उपलब्धता और दवाई में उपलब्ध कैमिकल की और रू त्र की गुणवत्ता को सुगमता से जाँच करना ड्रग कंट्रोलर का काम होता है । ड्रग कंट्रोलर विभाग के अधीनस्थ ड्रग इंस्पेक्टर नियमित रूप से बाज़ार में आने वाली नई दवाओं को सुगमता से गुणवत्ता की जाँच कर रहा है उसके उपरांत राज्य में बिक्री हेतु अनुमति देने के लिए सिफ़ारिश करना उसके बाद ही ड्रग कंट्रोल की अनुमति के उपरांत दवाओं की बिक्री की जाती है। लेकिन विभाग की उदासीनता और मिलीभगत व भ्रष्टाचार के कारण सारे नियम क़ानून कायदे ताक में रखकर सिफऱ् पैसे की वसूली प्रतिमाह दवाई डीलरों से और डिस्ट्रीब्यूटर से लेने के बाद क्वालिटी गुणवत्ता का स्तर और उसमें मानक जो दिया गया उसका उपयोग किया गया है कि नहीं ये जाने बिगर दवाइयों को बाज़ार में बेचा जा रहा है। छत्तीसगढ़ की जनता खऱाब और निम्न स्तर की कम गुणवत्ता वाली दवाईयों को खा रहे है जिससे कारण बीमारियों काठीक होना तो दूर और नई नई साइड इफेक्ट वाली बीमारियां कैंसर रोग की ओर अग्रसर हो रही है । डॉक्टर दवाई बदल बदलकर मरीज़ को देखकर एक्सपेरिमेंट करते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि दवाइयों में बताए गए अनुसार कैमिकल उपयोग नहीं होता दवाइयां नक़ली रहती है गुणवत्ता के अनुसार दवाइयां नहीं बनायी जाती है और नहीं बिक्री की जा रही है है।
