सिंध। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बदीन जिले में एक युवा हिंदू किसान की हत्या के बाद व्यापक विरोध-प्रदर्शन भड़क गए हैं। पाकिस्तानी समाचार पत्र द नेशन की रिपोर्ट के अनुसार, कैलाश कोलही नामक किसान को एक प्रभावशाली जमींदार सरफराज निजामानी ने कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी। आरोप है कि यह विवाद जमींदार की जमीन पर एक झोपड़ी बनाने को लेकर हुआ था।
हत्या के बाद गुस्साए लोगों ने बदीन–हैदराबाद राष्ट्रीय राजमार्ग और बदीन–थार कोयला सड़क पर धरना शुरू कर दिया, जिससे सैकड़ों वाहन घंटों तक जाम में फंसे रहे। प्रदर्शनकारियों ने ऐलान किया कि जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती, वे धरना समाप्त नहीं करेंगे।
सामाजिक कार्यकर्ता और पाकिस्तान दरावर इत्तेहाद के चेयरमैन शिवा काच्छी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर बयान साझा करते हुए कहा कि कैलाश कोलही की हत्या के खिलाफ चल रहा यह धरना इतिहास रच रहा है। उन्होंने कहा- कल सुबह 10 बजे से लेकर देर रात तक यह धरना बिना रुके जारी रहा। यह केवल एक विरोध नहीं, बल्कि जख्मी जमीर की पुकार है। पुरुष, महिलाएं, बुज़ुर्ग और मासूम बच्चे- सब एक ही मांग को लेकर सड़कों पर डटे रहे: कैलाश कोलही के हत्यारों की गिरफ्तारी।
शिवा काच्छी ने आगे कहा कि थकान, भूख और रात की ठंड के बावजूद प्रदर्शनकारियों का हौसला नहीं टूटा। उन्होंने कहा- कैलाश कोलही का एकमात्र ‘अपराध’ यह था कि वह गरीब और हाशिए पर रहने वाला था। उसके बच्चों के आंसू, उसकी मां का शोक और उसकी विधवा की खामोश पीड़ा आज पूरे सिस्टम से सवाल कर रही है- क्या गरीबों का खून इतना सस्ता है?
इससे पहले पीड़ित परिवार और समुदाय के लोगों ने पीरू लशारी स्टॉप पर शव रखकर प्रदर्शन किया था। उस समय एसएसपी बदीन ने आश्वासन दिया था कि 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यह घटना चार दिन पहले पीरू लशारी शहर क्षेत्र के राहो कोलही गांव में हुई थी, लेकिन ज़िला पुलिस अधिकारियों के आश्वासनों के बावजूद अब तक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
चल रहे धरने में कई राजनीतिक, राष्ट्रवादी, धार्मिक और सामाजिक संगठनों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए हैं। द नेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ, जिये सिंध महाज, कौमी अवामी तहरीक, जय सिंध कौमी महज और अवामी तहरीक शामिल हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक दोषियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक धरना जारी रहेगा। इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अल्पसंख्यकों और गरीब किसानों की सुरक्षा, भूमि विवादों और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
