लोकप्रिय जरिया बन चुका UPI आज करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है. सब्ज़ी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग, बिजली बिल, स्कूल फीस और ट्रैवल बुकिंग तक हर जगह UPI का इस्तेमाल हो रहा है. लेकिन अब इसी UPI को लेकर एक नया और सख्त नियम लागू किया गया है. जिसकी जानकारी न होने पर यूजर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
इस नए नियम का सीधा असर UPI अकाउंट की सुरक्षा और वैधता से जुड़ा है. अगर कोई यूजर लापरवाही करता है, गलत या पुरानी जानकारी का इस्तेमाल करता है. या जरुरी अपडेट्स को नजरअंदाज करता है. तो उसका UPI अकाउंट अस्थायी या स्थायी रुप से ब्लॉक किया जा सकता है.
सबसे बड़ी फिक्र की बात यह है कि कई लोगों को तब तक इसका पता नहीं चलता, जब तक उनका पेमेंट अचानक फेल न होने UPI से जुड़े नए नियम के तहत यह जरुरी किया गया है कि हर UPI अकाउंट एक सक्रिय, वैध और सही मोबाइल नंबर से जुड़ा होना चाहिए. अगर किसी यूज़र का मोबाइल नंबर इनएक्टिव है. बंद हो चुका है, या लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं है. तो उस नंबर से जुड़ी UPI ID को जोखिम भरा माना जाएगा.
इसके अलावा अगर बैंक या UPI सिस्टम को यह लगता है कि किसी अकाउंट से जुड़ी जानकारी अपडेट नहीं है. पहचान वेरिफिकेशन अधूरा है या यूजर लंबे समय से इनएक्टिव है तो उस अकाउंट पर पाबंदी लगाई जा सकती है.
इस नियम के पीछे सबसे बड़ी वजह है डिजिटल फ्रॉड और गलत लेन-देन को रोकना. कई मामलों में देखा गया है कि बंद मोबाइल नंबर किसी और को दोबारा मिल जाता है. 2.- उसी नंबर से जुड़ा UPI अकाउंट पुराना रहता है. नया यूजर अनजाने में पुराने बैंक अकाउंट से लिंक हो जाता है. ऐसी स्थिति में धोखाधड़ी, गलत ट्रांजैक्शन और डेटा मिसयूज़ की संभावना बहुत बढ़ जाती है. इसीलिए UPI सिस्टम को साफ और सुरक्षित रखने के लिए यह नियम लाया गया है.
लगातार नियमों की अनदेखी करने पर UPI ID को अस्थायी या स्थायी रुप से ब्लॉक किया जा सकता है. Google Pay, PhonePe, Paytm सब पर असर यह नियम किसी एक ऐप तक सीमित नहीं है. बल्कि सभी UPI प्लेटफॉर्म पर लागू होता है. रोजमर्रा के काम रुक सकते हैं. बिल पेमेंट, पैसे ट्रांसफर, ऑनलाइन खरीदारी सब कुछ प्रभावित हो सकता है. बैंक अकाउंट से जुड़ा मोबाइल नंबर हमेशा एक्टिव रखें.
मोबाइल नंबर बदला है तो तुरंत अपडेट करें 3. समय-समय पर UPI का इस्तेमाल करते रहें.
UPI ऐप में प्रोफाइल और KYC पूरी रखें.
किसी अनजान लिंक या कॉल से UPI जानकारी शेयर न करें.
इस वक्त कोई सार्वजनिक लिस्ट नहीं है. जिससे आप सीधे जान सकें कि आपका नंबर ब्लॉक हुआ है या नहीं. लेकिन अगर आप नीचे दिए गए लक्षण देख रहे हैं. तो सतर्क हो जाइए: लगातार UPI फेल हो रहा है. “Transaction under review” या “Could not process” जैसे मैसेज आ रहे हैं. QR कोड स्कैन करने पर भी पेमेंट नहीं हो पा रहा तो ऐसी स्थिति में अपने बैंक या UPI ऐप की हेल्पलाइनसे संपर्क करे.
हाल ही में पूरे देश में ऐसी खबरें आ रही हैं कि लोगों के बैंक खाते अचानक फ्रीज हो रहे हैं. कई मामलों में बिना कोई पहले नोटिस दिए खाते ठप्प कर दिए गए हैं. और कुछ लोगों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार भी किया गया. इससे आम लोगों के मन में यह सवाल पैदा हो रहा है कि आखिर ऐसा क्या नया नियम या कदम है जिसके चलते खातों पर यह कार्रवाई की जा रही है.
जब आपका बैंक खाता फ्रीज किया जाता है, तो आप उसमें से पैसे निकालने, ट्रांसफर करने या कोई भी लेनदेन करने में असमर्थ हो जाते हैं. खाते में मौजूद रकम सुरक्षित रहती है. लेकिन उसका इस्तेमाल अस्थायी तौर पर रोक दिया जाता है.
KYC पूर्ण ना होना – RBI के नियमों के मुताबिक अगर ग्राहक ने अपनी पहचान के लिए जरुरी दस्तावेज जैसे आधार, पैन आदि अपडेट नहीं किए हैं तो बैंक खाता फ्रीज कर सकता है.
संदिग्ध लेनदेन – अचानक बड़ी रकम के लेनदेन, बार-बार नकद ट्रांजैक्शन या विदेश भेजे गए पैसे की जांच हो सकती है. जिसके बाद खाता फ्रीज किया जा सकता है.
साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग – डिजिटल धोखाधड़ी, फर्जी ऐप या UPI स्कैम में शामिल खातों को फौरन फ्रीज करने का निर्देश दिया गया है.
कानूनी एजेंसियों के आदेश – आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय या पुलिस की जांच के दौरान भी खाते को ब्लाक या फ्रीज किया जा सकता है.
दरअसल, कोई नया कानून अचानक लागू नहीं किया गया है. बल्कि मौजूदा नियमों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित किया जा रहा है. RBI, गृह मंत्रालय और साइबर क्राइम सेल ने मिलकर यह कदम इसलिए उठाया है ताकि-
काले धन की रोकथाम हो सके
सायबर अपराधों में कमी आए
मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्त पोषण को रोका जा सके
इसीलिए बैंकों को संदिग्ध खातों पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.
गिरफ्तारी क्यों हो रही है?
हर बार खाता फ्रीज होने पर गिरफ्तारी नहीं होती है। जब जांच में पता चलता है कि:
खाता जानबूझकर धोखाधड़ी या अवैध गतिविधियों के लिए उपयोग किया गया है
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खाता खोला गया है.
साइबर ठगी से प्राप्त रकम को ट्रांसफर किया गया है
कई बार लोग बिना जाने किसी धोखाधड़ी के नेटवर्क का हिस्सा बन जाते हैं. जैसे कि बैंक खाता किराए पर देना.
खाता फ्रीज हो जाए तो क्या करें?
सबसे पहले अपने बैंक शाखा से संपर्क करें और स्थिति जानें.
अगर KYC अपडेट नहीं है तो तुरंत आवश्यक दस्तावेज जमा कराएं.
अगर मामला कानूनी है तो जांच एजेंसियों के साथ मदद करें.
किसी भी तरह की गलत सलाह या धोखाधड़ी से बचने के लिए बिना पूरी जानकारी के किसी दलाल की मदद न लें.
बैंक खाता फ्रीज होना चिंताजनक हो सकता है. लेकिन यह कदम सुरक्षा और वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। नियमों का पालन करें, KYC अपडेट रखें और संदिग्ध लेनदेन से बचें तो आपको चिंतित होने की जरुरत नहीं है.
अगर आपके पास एक से ज्यादा बैंक खाते हैं और उनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है. तो उन्हें बंद करा दीजिए. इस मामले में की गई लापरवाही से आपको कई बड़े नुकसान हो सकते हैं. वजह चाहे जो भी हो लेकिन आजकल एक से ज्यादा बैंक खाते रखने का ट्रेंड सा बन गया है. लेकिन इस बात की परवाह कम ही लोग करते हैं कि एक से ज्यादा अकाउंट रखना कई मामलों में नुकसानदायक है. आइए समझते हैं कि ज्यादा बैंक खाते रखने से और क्या-क्या नुकसान हैं.
आपके पास जितने ज्यादा बैंक अकाउंट होंगे उतने ही पैसे सालाना सर्विस और दूसरे चार्ज के तौर पर पेमेंट भी करने होंगे. इसके साथ ही शहर के हिसाब से अकाउंट में मिनिमम बैलेंस भी रखना होता है. जाहिर है कि जितने ज्यादा खाते होगें, हर साल मेंटिनेंस चार्ज के रुप में उतना ही ज्यादा खर्च उठाना पड़ेगा.
अगर आप मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं करते हैं. तो आप पर पेनाल्टी लगाई जाती है. अगर इस एवज में आप बार-बार पेनाल्टी भरते हैं. तो आपका सिबिल स्कोर खराब जाता है. इससे भविष्य में लोन लेने में मुश्किल आ सकती है.
जब आप अपना आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरते हैं. तो उसमें सभी बैंकों का खाता संख्या और आईएफएससी कोड दर्ज करना पड़ता है. इसके साथ ही पूरे वित्त वर्ष में बचत खाते पर अर्जित कुल आय और लेनदेन का पूरा ब्योरा देना होता है. कई बैंकों में अकाउंट होने पर आईटीआर भरते समय परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. यही नहीं, आय और व्यय में संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में कई तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
अगर सीए से रिटर्न भरवाते हैं, तो उसे सभी बैंक खातों के पूरे वित्त वर्ष के लेनदेन की जानकारी मुहैया करानी होती है. रिटर्न भरते समय सीए इसे जुड़ी सूचनाएं बार-बार मांग सकता है. अगर रिटर्न भरने के बाद कोई आयकर विभाग की ओर से कोई नोटिस आता है, तो और भी ज्यादा मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. सीए अंकित गुप्ता का कहना है कि आप जितने कम बैंक अकाउंट रखेंगे आपके लिए रिटर्न फाइल करना उतना ही आसान हो जाएगा. इससे आयकर विभाग की ओर से नोटिस मिलने की संभावना की काफी हद तक कम हो जाती है.
अगर किसी सेविंग या करंट अकाउंट में एक साल तक कोई लेनदेन नहीं होता है तो वह निष्क्रिय यानी इनएक्टिव हो जाता है. दो साल तक ट्रांजैक्शन नहीं होने पर वह डॉरमेंट अकाउंट में तब्दील हो जाता हैं. जिन खातों में लंबे समय तक लेनदेन नहीं होता, उनमें धोखाधड़ी की आशंका बढ़ जाती है.
कुल मिलाकर, जरुरत से ज्यादा बैंक खाते रखने में कोई समझदारी नहीं है. दो बैंक खाते पर्याप्त हो सकते हैं. इनमें से एक में सैलरी अकाउंट और दूसरा एसआईपी, बीमा प्रीमियम डीमैट खाते के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.
