जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा का मानना है कि खराब दौर से जूझ रही उनकी टीम आगामी टी20 विश्व कप में दमदार प्रदर्शन के जरिये विश्व क्रिकेट में फिर अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकती है। जिम्बाब्वे को सात फरवरी से शुरू हो रहे टूर्नामेंट में ग्रुप बी में पूर्व चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के साथ रखा गया है जबकि आयरलैंड और ओमान भी इसी ग्रुप में हैं।
पार्ल रॉयल्स और एमआई केपटाउन के बीच रविवार के मैच के बाद एसए20 द्वारा कराई गई बातचीत में रजा ने कहा, ‘विश्व कप हर क्रिकेटर के जीवन में अहम है। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि जिम्बाब्वे को विश्व क्रिकेट में और सम्मान पाना है तो विश्व कप की भूमिका अहम होगी।’
रजा ने एमआई केपटाउन पर सात विकेट से मिली जीत में रॉयल्स के लिये चार विकेट लिये।
उन्होंने कहा, ‘हम ऐसा प्रदर्शन करना चाहते हैं कि अपना सिर ऊंचा रखकर लौट सके और अपने देशवासियों को भी गर्व महसूस करने का मौका दें।’
उन्होंने कहा, ‘नतीजे हमारे हाथ में नहीं हैं लेकिन हम उनके बारे में ज्यादा चिंता नहीं करते। हमारा फोकस अच्छा क्रिकेट खेलने पर है और ऐसा करने पर नतीजे मिलेंगे।’
जिम्बाब्वे को ग्रुप मैच श्रीलंका में खेलने हैं जहां पिचें स्पिनरों की मददगार होंगी। रजा को यकीन है कि उनके पास अच्छे स्पिनर हैं जो इन पिचों पर बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे।
उन्होंने कहा, ‘अगर पिचें स्पिनरों की मददगार हुई तो हमारे पास काफी अच्छे गेंदबाज हैं।’
उन्होंने कहा कि विश्व कप से पहले एसए20 और आईएलटी20 खेलने से उनके खिलाड़ियों को काफी मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा, ‘जितना ज्यादा खेल सकें, उतना ही अच्छा होगा। जिम्बाब्वे के तीन क्रिकेटर आईएलटी20 में भी हैं।’
जिम्बाब्वे कभी भी बहुत मजबूत टीम तो नहीं थी लेकिन क्रिकेट की दुनिया में उसकी एक इज्जत थी। अपना दिन होने पर वह किसी भी टीम को हराने का माद्दा रखती थी। एक दौर में एंडी फ्लावर, ग्रांट फ्लावर, हेनरी ओलंगा जैसे जिम्बाब्वे खिलाड़ियों के नाम दुनियाभर के क्रिकेट प्रशंसकों की जुबान पर होते थे लेकिन अब करीब दो दशक से टीम की दुर्गति हो चुकी है।
रजा अपने छोटे भाई मुहम्मद माहिदी के असामयिक निधन के बाद केपटाउन खेलने आये हैं। तेरह वर्ष के माहिदी का बीमारी के कारण पिछले सोमवार को निधन हो गया।
एसए20 खेलने वाले जिम्बाब्वे के पहले क्रिकेटर रजा ने कहा, ‘मेरे जीवन का वह हिस्सा हमेशा कठिन रहेगा लेकिन अगर मैं मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक तौर पर तैयार नहीं होता तो यहां नहीं आता। मुझे लगा कि मैं योगदान दे सकता हूं तो मैं यहां आया।’
