नई दिल्ली। आयुष्मान कार्ड से मुफ्त इलाज को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है।
अब नए आयुष्मान कार्ड आधार आधारित ई-केवाईसी के बाद ही जारी किए जाएंगे।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने इसके लिए बेनिफिशयरी आइडेंटिफिकेशन सिस्टम को लागू कर दिया है।
इस नई व्यवस्था के तहत सभी लाभार्थियों की पहचान आधार ई-केवाईसी के माध्यम से अनिवार्य रूप से सत्यापित की जाएगी।
इसके साथ ही आयुष्मान कार्ड में नए सदस्य जोड़ने का विकल्प भी समाप्त कर दिया गया है। अब केवल एसईसीसी-2011 के तहत शेष पात्र परिवारों में ही, निर्धारित नियमों के अनुसार नए सदस्यों को जोड़ा जा सकेगा।
स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा ने बताया कि संदिग्ध आयुष्मान कार्डों की पहचान स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट पोर्टल के माध्यम से की जा रही है।
एनएचए द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक और ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर की मदद से ऐसे कार्डों की नियमित निगरानी की जाती है।
इस तकनीक के जरिए संदिग्ध कार्ड स्वतः चिन्हित हो जाते हैं और तत्काल उन पर इलाज की सुविधा रोक दी जाती है।
इसके बाद इन कार्डों की जांच ऑडिटर द्वारा कराई जाती है। जांच में सही पाए जाने वाले कार्डों को संदिग्ध श्रेणी से बाहर कर दिया जाता है।
