रायपुर, मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री उर्फ बाबा बागेश्वर इन दिनों छत्तीसगढ़ के भिलाई में हैं। वे पंच दिवसीय हनुमंत कथा के आयोजन के लिए गुरुवार (25 दिसंबर) को भिलाई पहुंचे। इस दौरान उनके यहां पहुंचने के तरीके को लेकर विवाद हो गया है। दरअसल वे छत्तीसगढ़ सरकार के शासकीय विमान द्वारा रायपुर पहुंचे, इसके बाद यहां से भिलाई गए। इस दौरान उन्हें लेने के लिए प्रदेश सरकार के एक मंत्री पहले विमान से सतना गए और उसके बाद उसी विमान से उन्हें लेकर राजधानी आए। इसके अलावा वर्दी पहने एक पुलिसकर्मी द्वारा उनके पैर छुने को लेकर भी विवाद पैदा हो गया है।
दरअसल बाबा बागेश्वर के रायपुर में स्टेट हैंगर पर विमान से उतरने का जो वीडियो सामने आया है, उसमें वहां मौजूद एक वर्दीधारी पुलिसकर्मी जूते उतारकर उनके पैर छूता नजर आ रहा है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इन दोनों घटनाओं को लेकर विवाद छिड़ गया है और लोग इसे सरकारी नियमों के खिलाफ बता रहे हैं।
सरकारी विमान से भिलाई पहुंचने को लेकर लोगों का कहना है कि धीरेंद्र शास्त्री कथा वाचक हैं और वह किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं। ऐसे में किसी निजी धार्मिक कार्यक्रम के लिए उनको सरकारी विमान से लाना बेहद गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सोशल मीडिया पर इस बारे में एक यूजर ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 14 समानता की बात करता है। यदि एक कथा वाचक को सरकारी संसाधन मिल सकते हैं, तो फिर आम नागरिक, लेखक, कलाकार या सामाजिक कार्यकर्ता क्यों नहीं? यह चयन किस आधार पर हुआ आस्था, प्रभाव या सत्ता की निकटता?
वहीं एक अन्य यूजर ने बताया कि क्योंकि सरकारी नियमों के अनुसार बाबा बागेश्वर को शासकीय विमान में यात्रा करने की पात्रता नहीं है, इसलिए उन्हें लाने के लिए राज्य सरकार के एक मंत्री गुरु खुशवंत साहेब को बकायदा मध्य प्रदेश के सतना भेजा गया। विमान सुबह साढे़ नौ बजे सतना विमानतल पर उतरा और आधे घंटे बाद दस बजे रायपुर के लिए रवाना हो गया।
रायपुर पहुंचने के बाद स्टेट हैंगर पर एक पुलिसकर्मी ने उनके पैर छुए। जिसके बाद लोगों ने पुलिसकर्मी के इस आचरण को भी पुलिस की गरिमा के खिलाफ और सरकारी नियमों के विरुद्ध बताया। लोगों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच के बाद उस पुलिसवाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की।
उधर भिलाई पहुंचने के बाद बाबा बागेश्वर ने मीडिया से बात की और इस दौरान बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा का जिक्र करते हुए कहा, ‘बांग्लादेश जैसी स्थिति आप अपने भारत में नहीं देखना चाहते हैं तो यही समय है, सही समय है, अभी नहीं तो कभी नहीं। यदि हिंदू आज एक नहीं हुआ, हिंदू एकजुट नहीं हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब भारत के और छत्तीसगढ़ के चौराहों-चौराहों पर ऐसा जो बांग्लादेश में हुआ वो देखा ना जाए। कांकेर की स्थिति पर भी बोलते हुए उन्होंने कहा, जो हुआ अच्छा नहीं हुआ, लेकिन हिंदुओं ने एकता दिखाई, उसके लिए समस्त हिंदुओं को साधुवाद, धन्यवाद। जब तक भारत हिंदू राष्ट्र नहीं हो जाएगा, हम यात्राएं करते रहेंगे। छत्तीसगढ़ की यात्रा उधार है।’
इस दौरान धर्मांतरण के मुद्दे पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘भारत में कैंसर से ज्यादा खतरनाक मतांतरण और धर्मांतरण है, इसके लिए समस्त सनातनी और हिंदू परंपरा के लोग कार्य कर रहे हैं, हम भी करेंगे। धर्मांतरण के तीन कारण हैं, अशिक्षा, अंधविश्वास और आर्थिक तंगी। तो जो समृद्ध हिंदू हैं उन्हें तीनों सिद्धांतों से हिंदुओं को पुष्ट करना पड़ेगा। जो बहुत समृद्ध हिंदू हैं, जो निम्न हिंदू हैं, जिनकी आर्थिक तंगी हैं, वह धर्मांतरण के प्रति बहुत जल्दी लालच में आ जाते हैं, जागृति की आवश्यकता है। अंधविश्वास फैलाकर वो लोग धर्मांतरण करवाते हैं। हम पूजापाठ के नाम पर धर्मांतरण के विरोधी हैं।’
