रायपुर। छत्तीसगढ़ में निजी अस्पतालों द्वारा 01 सितम्बर 2025 से आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत कैशलेस इलाज बंद करने की घोषणा पर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग ने गहरी चिंता व्यक्त की है।
आयोग के पूर्वी ज़ोन के जनसंपर्क अधिकारी अज़ीम खान व छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव प्रदुमन शर्मा ने बताया कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के अनुसार अस्पतालों को पिछले लगभग छह महीनों से भुगतान नहीं मिला है। मार्च 2025 में TPA अनुबंध समाप्त होने के बाद से नया अनुबंध न होने के कारण हज़ारों दावे लंबित हैं। इस वजह से निजी अस्पताल आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और उन्होंने योजना से बाहर होने का निर्णय लिया है।
अज़ीम खान ने कहा की आयुष्मान योजना का उद्देश्य ही है कि गरीब और मध्यमवर्गीय नागरिकों को निःशुल्क और सम्मानजनक इलाज मिल सके। यदि निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज बंद हो जाता है तो यह योजना अपने मूल उद्देश्य से भटक जाएगी और आम जनता गंभीर संकट में पड़ जाएगी। राज्य सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर इसका स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
शप्रदुमन शर्मा ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक या वित्तीय समस्या नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे जनता के जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार पर आघात है छत्तीसगढ़ के लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार आयुष्मान योजना पर पूरी तरह निर्भर हैं। यदि निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज बंद होता है, तो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज इलाज से वंचित हो सकते हैं। यह मानवाधिकार का गंभीर उल्लंघन है।”
आयोग की मुख्य मांगें
1. लंबित भुगतान का तत्काल निपटान – सितंबर से पहले सभी निजी अस्पतालों को बकाया राशि जारी की जाए।
2. पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान प्रणाली – भविष्य में विलंब रोकने हेतु ऑटोमेटेड ऑनलाइन भुगतान तंत्र लागू किया जाए।
3. सरकारी अस्पतालों की तैयारी – संभावित संकट को देखते हुए दवा, बेड और स्टाफ की अतिरिक्त व्यवस्था तत्काल की जाए।
4. त्रिपक्षीय संवाद समिति – राज्य सरकार, निजी अस्पताल और TPA/बीमा कंपनियों के बीच स्थायी समिति बनाई जाए।
आयोग ने यह ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो यह स्थिति राज्य में स्वास्थ्य आपातकाल जैसी परिस्थिति उत्पन्न कर सकती है।
ऐसे ही हरियाणा में 650 से अधिक निजी अस्पतालों ने 7 अगस्त से आयुष्मान योजना में इलाज बंद करने की चेतावनी दी है, क्योंकि ₹500-600 करोड़ से अधिक भुगतान लंबित है। अस्पतालों ने MoU जलाकर विरोध जताया और त्वरित समाधान की मांग की है।
आयोग की छत्तीसगढ़ प्रशासन से अपील
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग ने स्वास्थ्य मंत्री और राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वे तत्काल हस्तक्षेप कर इस संकट का स्थायी समाधान निकालें, ताकि छत्तीसगढ़ की जनता को अपने स्वास्थ्य अधिकार से वंचित न होना पड़े।
